नई दिल्ली/चेन्नई, 15 जून (आईएएनएस)। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के साथ छह बैंकों के विलय के प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी मिलने के बाद एसबीआई अध्यक्ष अरुं धति भट्टाचार्य ने इसे सभी पक्षों के लिए लाभकर बताया है।
यह मंजूरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की हुई एक बैठक में बुधवार को दी गई। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता ने आईएएनएस से कहा कि संवाददाता सम्मेलन में हालांकि इस विलय को मिली मंजूरी का उल्लेख नहीं किया गया।
छह बैंकों में शामिल हैं- स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर (एसबीजेजे), स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद (एसबीएच), स्टेट बैंक ऑफ मैसूर (एसबीएम), स्टेट बैंक ऑफ पटियाला (एसबीपी) और स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर (एसबीटी) और भारतीय महिला बैंक लिमिटेड (बीएमबी)।
एसबीआई द्वारा जारी बयान में भट्टाचार्य ने कहा, “एसबीआई और इसके सहयोगी बैंकों का विलय दोनों के लिए लाभकर है।”
उन्होंने कहा, “शाखाओं के व्यस्थित किए जाने से, निधि एक किए जाने से और विशाल कौशल संसाधन आधार को ठीक तरह से तैनात किए जाने से क्षमता बढ़ेगी।”
विलय को मंजूरी मिलने की खबर से एसबीआई और तीन सूचीबद्ध सहयोगी बैंकों एसबीएम, एसबीजेजे और एसबीटी के शेयरों में तेजी दर्ज की गई।
पांच सहयोगी बैंकों के श्रमिक संघों ने इस प्रकार से बैंकों का विलय किए जाने का विरोध किया है।
ऑल इंडिया बैंक एंप्लाईज एसोसिएशन (एआईबीईए) ने पांचों सहयोगी बैंकों का एक में विलय किए जाने की मांग की थी।
एसोसिएशन के महासचिव सी.एच. वेंकटाचलम ने आईएएनएस से कहा, “दुर्भाग्य की बात है कि संघों और राजनीतिक पार्टियों के विरोध के बावजूद सरकार ने पांच सहयोगी बैंकों को बंद करने और उनके कारोबार एसबीआई को दे देने का फैसला किया है।”
उन्होंने कहा, “कल (गुरुवार को) एआईबीईए के अधिकारी चेन्नई में एक बैठक करेंगे और इस संदर्भ में फैसला लेंगे।”
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