नई दिल्ली, 18 जून (आईएएनएस)। प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) के पिछले तीन सत्रों में खिताब अपने नाम कर पाने में असफल रही दबंग दिल्ली की टीम ने लीग के चौथे सत्र में कई नए खिलाड़ियों को शामिल किया है। वहीं, टीम ने इस सत्र में सागर बांडेकर को मुख्य कोच बनाया है।
नई दिल्ली, 18 जून (आईएएनएस)। प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) के पिछले तीन सत्रों में खिताब अपने नाम कर पाने में असफल रही दबंग दिल्ली की टीम ने लीग के चौथे सत्र में कई नए खिलाड़ियों को शामिल किया है। वहीं, टीम ने इस सत्र में सागर बांडेकर को मुख्य कोच बनाया है।
पिछले सत्र के सिर्फ दो खिलाड़ी काशीलिंग अदाके और के.सेल्वामणि को ही टीम ने इस सत्र के लिए अपने साथ बनाए रखा है। बाकी कई नए खिलाड़ियों के साथ दिल्ली लीग के अगले सत्र में जीत के इरादे से उतरेगी।
काशीलिंग का मानना है कि खिलाड़ियों के लिए टीम नई है लेकिन लीग वही है। खिलाड़ियों को पास अनुभव है जिसके कारण उन्हें एकजुट होकर खेलने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
टीम की जर्सी लॉन्ज के मौके पर आए काशीलिंग ने शनिवार को कार्यक्रम से इतर आईएएनएस से साक्षात्कार में कहा, “टीम में नए खिलाड़ी हैं, लेकिन सभी लोग लीग में खेल चुके हैं। कई खिलाड़ी मुझसे भी सीनियर हैं। सभी में जोश है और सभी जीतना चाहते हैं, इसलिए साथ खेलने में दिक्कत नहीं होगी और हम इस सत्र में अच्छा प्रदर्शन करेंगे।”
पिछले सत्र में अंकतालिका में सबसे नीचे रही दिल्ली ने इस बार सागर बांडेकर को टीम का मुख्य कोच बनाया है। कोच के बारे में पूछे जाने पर काशीलिंग ने कहा कि कोच का ध्यान पुरानी गलतियों को न दोहराने पर है।
उन्होंने कहा, “कोच ने अभ्यास में हमारी गलतियों पर काफी जोर दिया है और हमें बताया है कि हमें किस तरह इससे बचना है। वह हमारे साथ काफी मेहनत कर रहे हैं। उनके आने से काफी कुछ सीखने को मिला है।”
आने वाले सत्र में अपनी रणनीति के बार में काशीलिंग ने कहा, “हमारा ध्यान पिछले सत्र की गलतियों पर को न दोहराने पर है और हम अपनी रणनीति मैदान पर ही दिखाएंगे।”
उन्होंने कहा, “कोच हमारी छोटी से छोटी गलती पर ध्यान देते हैं। हमने रणनीति तैयार की है जिसे हम मैदान पर ही दिखाएंगे।”
पीकेएल के बाद कबड्डी खेल की लोकप्रियता में बढ़ावा देखने को मिला है। इस सवाल के जबाव में उन्होंने कहा, “यह खेल अब हर घर में है। हर बच्चा कबड्डी खेलता है। पहले मेरे गांव में सिर्फ 20-25 लड़के खेलते थे, लेकिन अब वहां नौ क्लब हैं और एक क्लब में 60-70 बच्चे हैं। जाहिर है कबड्डी की लोकप्रियता बढ़ी है।”
क्रिकेट को धर्म मानने वाले भारत देश में कबड्डी को करयिर के तौर पर लेने पर काशिलिंग ने कहा, “यह मिट्टी का खेल है और इसमें एक्शन होता है सभी को मजा आता है। मुझे भी मजा आता था इसिलए इसे करियर बनाया।”
अभी तक खिताब न जीत पाने पर काशीलिंग ने कहा, “हमने कुछ गलतियां की थीं जिस कारण हम अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए। हमारी कोशिश अब उन गलतियों को न दोहराने की है।”
उन्होंने कहा, “कुछ न कुछ गलतियां हो जाती हैं। कभी डिफेंस में तो कभी कहीं। कोई भी टीम हारने नहीं आती। हमारी कोशिश गलतियों में सुधार करने की है।”
काशीलिंग इस लीग में किस टीम को अपना सबसे कड़ा प्रतिद्वंदी मानते हैं, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि सारी टीम मजबूत हैं।
उन्होंने कहा, “किसी एक टीम को मजबूत नहीं कह सकते। पहले सत्र में जयपुर ने फाइनल जीता, इसके बाद मुंबई ने और तीसरे सत्र में पटना ने फाइनल जीता। इसलिए किसी एक टीम को मजबूत बताना सही नहीं। जो टीम अच्छा खेलेगी वह जीतेगी।”
dharmpath.com dharmpath