अमेरिकन सोसाइटी फॉर माइक्रोबायोलॉजी द्वारा प्रकाशित ‘एंटीमाइक्रोबियल एजेंट्स एंड कीमोथेरेपी’ पत्रिका के अनुसार, यह जीन एसचेरिचिया कोलाई से अलग है जो मूल रूप से 2015 में न्यूयॉर्क के एक रोगी में पाया गया था।
इससे पहले मई के महीने में पेंसिल्वेनिया की एक महिला में एसचेरिचिया कोलाई जीवाणु की पहचान हुई थी। जो हाल-फिलहाल अमेरिका से बाहर नहीं गई थी।
एमसीआर-1 जीन जीवाणु को एंटीबायोटिक कोलिस्टिन के प्रति प्रतिरोधी बना देता है। जो बहु-औषधीय प्रतिरोधी संक्रमण वाले रोगियों की चिकित्सा में एक आखिरी विकल्प के रूप में प्रयोग किया जाता है।
–आईएएनएस
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