लंबी व तीखी बहस और सड़कों पर हिंसक प्रदर्शनों के बाद श्रम सुधार को लागू करने का सरकार का प्रस्ताव कानून बन गया। किसी भी पार्टी ने इस संबंध में आपत्ति नहीं दी और निंदा प्रस्ताव नहीं लाया।
फ्रांस के प्रधानमंत्री मैनुएल वाल्स ने सांसदों की सहमति के बिना ही सुधारों को मंजूरी दे दी थी।
संवैधानिक शक्तियों के इस्तेमाल से सरकार पर अविश्वास प्रस्ताव का खतरा था। यदि विपक्षी 24 घंटे के भीतर निंदा प्रस्ताव लाते तो यह स्थित उत्पन्न हो सकती थी।
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