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क्या भारतीय मीडिया परिपक्व है? उठते सवाल

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रमुख हो या विचाराधीन मामलों में मीडिया का संयम. निर्मल यादव का कहना है कि भारत में फटाफट खबर ब्रेक करने की अंधाधुंध होड़ ने प्रेस की परिपक्वता पर सवालिया निशान लगा दिया है.मीडिया की खबरें न्यायाधीशों के फैसलों पर असर डालती हैं. निर्भया मामले में विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री के प्रसारण पर रोक हटाने की अपील पर सुनवाई …

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विश्व परिदृश्य और पत्रकारिता की भूमिका

अमेरिका के एक जानेमाने न्यूज चैनल के एंकर ने इराक युद्ध की रिपोर्ट में मनगढ़ंत बातें जोड़ दी. ग्रैहम लूकस का कहना है कि यह मामला पत्रकारों की विश्वसनीयता और उनके मूल्यों पर सवाल खड़े करता है. गंभीरता से काम करने वाले पत्रकार अपने पेशे को आधुनिक लोकतांत्रिक समाज के लिए बेहद अहम करार देने से नहीं हिचकिचाते. कार्यपालिका, विधायिका …

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दिल्ली में “आप”की जीत-राजनीतिक पार्टियों के लिए मंथन का सन्देश

दिल्ली में प्रांतीय चुनाव के नतीजे नरेंद्र मोदी की सत्ताधारी पार्टी और दूसरी पार्टियों के लिए गंभीर चेतावनी है. वे दिखाते हैं कि लोग जीवन परिस्थितियों में बेहतरी चाहते हैं, आर्थिक विकास चाहते हैं, धार्मिक विभाजन नहीं. दिल्ली के चुनाव में मतदाता तीन बातों से प्रभावित हुए हैं. उन्होंने इस बात को गंभीरता से लिया है कि मोदी सरकार ने …

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मोदी और संघ के एजेंडे में फर्क से तनाव

भारत में धार्मिक सहिष्णुता के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव बढ़ता जा रहा है. कुलदीप कुमार का कहना है कि उन्हें जल्द ही देश के विकास या हिंदुत्ववादी एजेंडे में से एक को चुनना होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो नावों पर सवार हैं, और सभी जानते हैं कि दो नावों पर बहुत देर तक सवार नहीं रहा जा …

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हिन्दू धर्म : एक जीवन दर्शन, ना कि एक विचारधारा

                                           पुनः आधुनिक इतिहास साक्षी है कि कालक्रम में बाहरी आक्रान्ताओं के द्वारा भारतवर्ष का लूटपाट,धन का दोहन, तथा इस्लामिक एवं यवन सत्ता तंत्र ने भारतवर्ष का जितना नुकशान नहीं पहुँचाया उससे कहीं अधिक नुकशान विचारधाराओं पर आधारित  विद्यालयों एवम् …

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अमीर को उच्च और गरीब को हेय समझना अनुचित-चाणक्य नीति

हमारे देश में गरीब, मजदूर तथा निम्न आय वाले व्यवसायियों के साथ हमदर्दी का एक बकायदा अभियान आजादी के साठ वर्षों से चल रहा है।  पश्चिम में जन्मे कार्ल मार्क्स ने अपना एक ग्रंथ लिखकर मजदूरों के मसीहा की छवि पायी और उसके भारतीय अनुयायी प्रायः देश में व्याप्त आर्थिक विरोधाभासों पर टिप्पणियां कर यह प्रमाणित करने का प्रयास करते …

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भारत और भारतीयता ने क्या खोया है पिछले 100 -200 सालों में?

भारत और भारतीयता ने क्या खोया है पिछले १00 -२00 सालों में? अध्यात्म कि सीढ़ियां व्यापार का मार्ग बन गयीं, राजनीति की सफलता सहयोग और सेवा के लिए नहीं बल्कि धन और बाहुबल के लिए हो गयी, पत्रकारिता नहीं बची सत्य का दर्पण बल्कि वो बाजारों की अस्मिता का खेल हो गयी, कवि की कविता जीवन का कटु सत्य तो नहीं बनी बल्कि बाजार की …

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ग्रीन पीस को मिली राहत- विदेशी चंदा न्यायालय ने किया बहाल

पिछले साल भारत के गृह मंत्रालय ने ग्रीनपीस इंडिया के विदेशी चंदे को बंद कर दिया था. ग्रीनपीस ने इसे दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. कोर्ट के मुताबिक किसी व्यक्ति या संस्था का सोच सरकार के सोच से मेल नहीं खाता, इसका मतलब ये नहीं है कि वे गलत है या उनका सोचना राष्ट्रहित में नहीं है. इस फैसले …

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पाकिस्तान पर अभी और दबाव की ज़रूरत

पाकिस्तान के पेशावर में सैनिक स्कूल में पाकिस्तानी तालिबानियों के नंगे नाच के बाद अचानक से शरीफ सरकार और सेना के बीच आतंकियों के सफाए को लेकर रणनीति बनती नज़र आ रही थी| ऐसे भी कयास लगाए जा रहे थे कि मासूम अबोध बच्चों की निर्दयतापूर्ण कार्रवाई के बाद पाकिस्तान भारत विरोधी आतंकवाद के मुद्दे पर सकारात्मक रुख अख्तियार करेगा …

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धर्म के आदर के नाम पर

“मघ्ययुगीन अतार्किक होने का एक रूप है धर्म और जब हम इसे आधुनिक हथियारों से मिला देते हैं तो यह हमारी आज़ादी के लिए ख़तरा बन जाता है। इस एकछत्र धार्मिक नियंत्रणवाद ने इस्लाम के दिल में ख़तरनाक घाव कर दिया है और आज हमने पेरिस में इसका एक दुखद नतीजा भी देखा। मैं शार्ली एब्दो के साथ हूं और …

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