नई दिल्ली-उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम में नोएडा से जुड़े पुराने राजनीतिक टोटके का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब मुख्यमंत्री नोएडा जाने से बचते थे. माना जाता था कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाता है, उसकी कुर्सी चली जाती है. योगी ने कहा कि जब वह साल 2017 में पहली बार मुख्यमंत्री बने और उन्होंने नोएडा जाने का कार्यक्रम बनाया, तब उन्हें भी लोगों ने इस बात की याद दिलाई. लेकिन उन्होंने साफ कहा कि अगर जनता के काम के लिए जाना है तो किसी टोटके से डरने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, “जो कुर्सी कल जानी है, आज चली जाए, लेकिन जनता की सुनवाई जरूर होगी.”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि जब उन्होंने नोएडा जाने का फैसला किया था, तब कई लोगों ने उन्हें वहां न जाने की सलाह दी. उनका कहना था कि नोएडा जाने वाले मुख्यमंत्री की सरकार दोबारा नहीं बनती. योगी ने कहा कि उन्होंने इस बात को कभी गंभीरता से नहीं लिया. उन्होंने कहा कि अगर जनता के बीच जाना और उनकी समस्याएं सुनना है, तो ऐसे टोटकों का कोई मतलब नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया कि 2017 से पहले भी मुख्यमंत्री थे, लेकिन वे नोएडा क्यों नहीं जाते थे. उनका कहना था कि पहले के नेता कुर्सी बचाने में ज्यादा लगे रहते थे, जबकि उनकी सरकार जनता की सेवा को सबसे ऊपर रखती है.
अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी तंज कसा. उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं की दिनचर्या ही अलग है. योगी ने कहा कि वे देर से उठते हैं, फिर कुछ लोगों से सलाह लेते हैं, सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं और उसके बाद जिम चले जाते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे लोग प्रदेश की जिम्मेदारी कैसे संभाल सकते हैं. योगी ने दावा किया कि जो लोग खुद अपने काम को सही तरीके से नहीं संभाल पाते, वे राज्य का विकास भी नहीं कर सकते. उन्होंने अपने बयान के जरिए विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता अब सब समझ चुकी है.
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