क्या धरती से मनुष्य के जाने का समय आ गया है?

pralayaधरती पर मनुष्य से ज्यादा पुराने जीव भी हैं। डायनासोर जैसे विशालकाय जंतु तो लाखों करोंड़ों साल पुराने हैं, जो हजारों लाखों साल की यात्रा पूरी कर लुप्त भी हो गए। जर्मनी के जीव विज्ञानी डाक्टर सीम चियार्ड का कहना है कि बल, बुद्धि, संगठन और सहजीविता के क्षेत्र में मनुष्य से बहुत आगे होते हुए भी वह नष्ट हो गए।

उनके नष्ट होने के कारणों का विश्लेषण करते हुए डा. सीम का कहना है कि अब मनुष्य की बारी है। उनके अनुसार इसके कई कारण हैं। प्रमुख कारण है संयम और विवेक का घटते जाना। समुद्र, धरती और आकाश को अपनी मौजूदगी और गतिविधियों से कंपकंपाते रहने वाले इन विशालकाय और महाबली जीव जंतुओं की आक्रामकता ने ही उन्हें मार डाला।

ताजा उदाहरण शेर, चीते, बाघ, भालू, बाज, चील आदि का देते हुए एक अध्ययन में उन्होंने कहा कि ये जीव जंतु भी कम होते जा रहे हैं। 1970 में इन जीवों की गणना और आंकड़ों की तुलना 2010 के आंकड़ों से करते हुए वे इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि इन जानवरों की संख्या कम होते जाने का कोई खास कारण नजर नहीं आता।

ये जानवर आपसी संघर्षों और उनके जीवन को संभव बनाने वाली परिस्थितियों के कारण कम होते गए। जैसे उनके लिए जगह कम पड़ती गई,� शिकार के लिए जानवरों की संख्या घटने लगी, उनके अपने छुपने और जीवन की रक्षा कर सकने वाली स्थितियां सिमटने लगी।

इस अध्ययन की तुलना मनुष्य समाज से करते हुए डा. सीम का कहना है कि पचास साल पहले की तुलना में मनुष्य संख्या दो गुना से ज्यादा बढ़ गई है। तब कहा तो यह जा रहा था कि बढ़ती हुई आबादी अपने बोझ से खुद कम होने लगेगी।

वैज्ञानिक प्रयोगों और आविष्कारों के कारण खतरा उस रुप में तो नहीं आया है पर मनुष्य के स्वभाव में बढती हुई आक्रामकता, स्वार्थ लिप्सा और भोग को उन्होंने सबसे बड़ा खतरा बताया है। उनके अनुसार समाज को संस्कारित, संतुलित और मर्यादित रख सकने वाली अध्यात्म वृत्ति ही मनुष्य को बचा सकेगी।

About Dharm Path


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493