आईआईटी इंदौर के दीक्षाँत समारोह में राष्ट्रपति श्री मुखर्जी
राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि ज्ञान आधारित अर्थ-व्यवस्था वर्तमान समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भौतिक अधोसंरचना विस्तार के साथ नवाचार की संस्कृति के विकास और गुणवत्ता बढ़ाने की जरूरत है। वे आज इंदौर में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर के प्रथम दीक्षाँत समारोह को संबोधित कर रहे थे।
राष्ट्रपति ने उपाधि प्राप्त करने वाले स्नातकों का आव्हान किया कि वे हर दिन और हर समय सीखते रहने की प्रेरणा लें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की शिक्षा पर समाज ने निवेश किया है इसलिये समाज के हित में अपने ज्ञान का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और केन्द्रीय विश्वविद्यालय मानव संसाधन को सक्षम बनाने और चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करने का वातावरण बना सकते हैं।
राष्ट्रपति श्री मुखर्जी ने कहा है कि मानव संसाधन के विकास के लिये साठ के दशक में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के विस्तार का निर्णय लिया गया था। उन्होंने भविष्य में ज्ञान संपन्न मानव संसाधन की जरूरत को देखते हुए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार की जरूरत बताते हुए कहा कि देश में 2 करोड़ 50 लाख विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और 12वीं योजना में एक करोड़ विद्यार्थी और जुड़ जायेंगे। इसे देखतेे हुए उच्च शिक्षा संस्थानों का विस्तार पर्याप्त नहीं है। देश में 659 विश्वविद्यालय और 33 हजार कॉलेज हैं। उन्होंने कहा कि जर्मनी में दाखिले का प्रतिशत 21 और अमेरिका में 37 प्रतिशत है जो भारत में सात प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि इसे बढ़ाने के लिये उच्च शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा, उच्च शिक्षा तक पहुँच और उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ई-क्लास रूम जैसी सुविधाओं से विद्यार्थी सुदूर बैठे विषय-विशेषज्ञों से व्याख्यान का लाभ ले सकते हैं। श्री मुखर्जी ने उच्च शिक्षा के लिये स्कालरशिप देने की दिशा में और ज्यादा काम करने की जरूरत बताई।
राष्ट्रपति ने भारतीय अर्थ-व्यवस्था स्थिति की चर्चा करते हुए कहा कि जीडीपी निराशाजनक नहीं है। वर्ष 1951 के दशक में 3.5 प्रतिशत, अस्सी के दशक में 5.5 प्रतिशत और नब्बे के दशक में 6 प्रतिशत की दर से बढ़ी। पिछले दस साल में यह दर 7.9 प्रतिशत से बढ़ी। उन्होंने कहा कि गरीबी उन्मूलन की दिशा में पिछले बीस साल में संतोषजनक काम हुआ है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में साहस, आत्म-विश्वास और क्षमता की जरूरत है।
राष्ट्रपति ने कहा कि उच्च शिक्षा, ज्ञान और कौशल का विस्तार वर्तमान समय की आवश्यकता है। इसके साथ ही गुणवत्ता बढ़ाने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि 200 श्रेष्ठ विश्वविद्यालय की सूची में भारतीय विश्वविद्यालय का उल्लेख नहीं होना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि भारत में तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय थे जिनका विश्व में नाम है। ये विश्वविद्यालय केम्ब्रिज और हावर्ड से भी पहले स्थापित हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत में क्षमता और प्रतिभा है, जिसका पूरा उपयोग करना चाहिये। श्री मुखर्जी ने कहा कि नवाचार को प्रोत्साहित करना सर्वाधिक श्रेष्ठ विकल्प है। नवाचार की संस्कृति को प्रोत्साहित करने वाली 100 अंतर्राष्ट्रीय कंपनी में भारत की केवल तीन कंपनी का उल्लेख है। उच्च शिक्षा अधोसंरचना में विस्तार, नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देना होगा। इसके लिये सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को मिलकर कार्य करना होगा।
आईआईटी संचालक मंडल के अध्यक्ष श्री अजय पीरामल ने कहा कि वर्तमान अर्थ-व्यवस्था में युवाओं के लिये पर्याप्त अवसर हैं। वे राष्ट्र और विश्व में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं। विज्ञान और तकनीकी के विकास से लोगों के जीवन में बदलाव आना चाहिये। संस्थान के निदेशक डॉ. प्रदीप माथुर ने संस्थान की प्रगति का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने परिसर के विकास और अकादमिक उपलब्धियों की जानकारी दी।
राष्ट्रपति ने उत्कृष्ट अकादमिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पदक प्रदान किये। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई तथा उन्हें शपथ दिलाई गई। राज्यपाल श्री राम नरेश यादव, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्री महेन्द्र हार्डिया, पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री सुरेश पचौरी, डॉ. निलेश जैन, संकाय के सदस्य और संस्थान के विद्यार्थी उपस्थित थे।
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