नई दिल्ली। काली कमाई को सफेद बनाने के आरोप में घिरे देश के तीन प्रमुख निजी बैंकों पर रिजंर्व बैंक ने मामूली आर्थिक दंड लगाया है। लगभग ढाई महीने की जांच के बाद एक्सिस बैंक पर पांच करोड़ रुपये, एचडीएफसी बैंक पर 4.5 करोड़ रुपये और आइसीआइसीआइ बैंक पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। ग्राहकों की पहचान सत्यापित करने यानी केवाईसी संबंधी नियमों का सख्ती से पालन नहीं करने का दोषी पाए जाने पर यह जुर्माना लगा है। मगर आरबीआइ को इन बैंकों के खिलाफ मनी लांड्रिंग के कोई सुबूत नहीं मिले हैं।
न्यूज पोर्टल कोबरापोस्ट ने स्टिंग ऑपरेशन के जरिये यह सनसनीखेज आरोप लगाया था कि देश के कुछ निजी व सरकारी बैंक और बीमा कंपनियां मनी लांड्रिंग का काम कर रहे हैं। इन पर यह भी आरोप लगाया गया था कि ये काली कमाई को सफेद कर रहे हैं। कोबरापोस्ट ने दो चरणों में यह स्टिंग किया था। पहले चरण में एक्सिस, एचडीएफसी और आइसीआइसीआइ बैंक पर यह आरोप लगे थे। वेबपोर्टल ने सुबूत के तौर पर वीडियो फुटेज मीडिया के सामने पेश किया था कि किस तरह से बैंक व बीमा कंपनियों के अधिकारी तमाम नियम कानून को ताक पर रख कर यह काम कर रहे हैं।
रिजर्व बैंक ने इन आरोपों की जांच करने के बाद सोमवार को जुर्माना लगाने की घोषणा की है। अन्य बैंकों के बारे में मिली शिकायतों की जांच की जा रही है। उन पर भी जल्द फैसला होगा। रिजर्व बैंक ने तीनों निजी बैंकों को सहकारी बैंको की तरफ से जारी चेक का सही तरीके से परीक्षण नहीं करने, बैंक खातों का समय समय पर एंटी मनी लांड्रिंग और केवाईसी [अपने ग्राहकों को जानें] नियमों के तहत जांच पड़ताल नहीं करने का दोषी पाया है। साथ ही 50 हजार रुपये से ज्यादा राशि के सोने के सिक्के बेचने के समय केवाईसी के तहत उठाए जाने वाले कदमों का भी इन बैंकों ने उल्लंघन किया है।
सनद रहे कि मौजूदा कानून के तहत बेहद गंभीर माने जाने वाले इन आरोपों पर काफी आसान सजा का प्रावधान हैं। रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने हाल ही में कहा था कि भारत में बैंकों के खिलाफ काफी नरमी बरती जाती है। दोषी पाए जाने के बावजूद भारतीय बैंक सिर्फ पांच करोड़ रुपये दे कर बच निकलते हैं। अमेरिका या अन्य देशों में इस तरह की गड़बड़ियों पर भारी जुर्माना लगाया जाता है।
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