नईदिल्ली – केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने रविवार को यह दावा किया था कि देश में 2029 तक यानी अगले आम चुनावों से पहले देश के 21 एनडी शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हो जाएगा. गृह मंत्री के इस दावे पर 24 घंटे से पहले ही सहयोगियों में विरोध के स्वर दिखने लगे हैं. केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार में ही विरोध के स्वर दिख रहे हैं. बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार में तेलुगु देसम पार्टी (TDP), जनता दल यूनाइटेड (JDU) और लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास) यानी LJP ने गृह मंत्री के बयान पर जो प्रतिक्रिया दी है उससे सरकार की टेंशन बढ़ना तय है.
प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी की 3.0 सरकार में 16 सांसदों वाली तेलुगु देसम पार्टी बीजेपी की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है और उसके लावु कृष्ण देवरायालु ने साफ कर दिया है कि इस मुद्दे पर हम बात करेंगे. अंग्रेजी दैनिक टाइम्स ऑफ इंडिया में देवरयालु के हवाले से लिखा गया है, ‘अभी तक इस विषय पर कोई बात नहीं हुई है, लेकिन जब भी हमें इस मुद्दे पर बातचीत की जरूरत महसूस होगी, हम इसे देखेंगे. इसे अपनाने से पहले हम निश्चित ही विभिन्न हितधारकों को इसमें शामिल करेंगे.’
बता दें टीडीपी के पार्टी प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद ही एनडीए में शामिल होने से पहले ही यूसीसी पर पार्टी का रुख साफ कर दिया था. उन्होंने कहा था कि यूसीसी की बात आने पर टीडीपी मुस्लिम समुदाय के साथ खड़ी होगी. TDP के अलावा NDA को समर्थन देने वाले जेडीयू के 12 और एलजेपी के लोकसभा में 5 सांसद हैं. तीनों इस मुद्दे पर बीजेपी के साथ नहीं दिख रहे.
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