ukraine: भारतीय छात्रों ने कहा,पढ़ाई पूरी कर के जाएंगे या ताबूत में

यूक्रेन में रूस के बढ़ते हमलों के मद्देनज़र भारत ने वहां रह रहे भारतीयों को वापस देश लौटने का परामर्श दिया है. हालांकि कुछ समय पहले वहां पहुंचे 1,500 से अधिक भारतीय छात्रों ने इससे इनकार करते हुए कहा कि वे अपनी पढ़ाई पूरी करके वापस जाएंगे या फिर ताबूत में. उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है.

नई दिल्ली: भारत सरकार की रूस के बढ़ते हमलों में के मद्देनजर तुरंत युद्धग्रस्त यूक्रेन छोड़ने की सलाह के बावजूद, 1,500 से अधिक भारतीय छात्र, जो कुछ महीने पहले वापस वहां गए थे, भारत आने से इनकार कर रहे हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उनका कहना है कि वे यूक्रेन में अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं, भले ही इसका मतलब यह हो कि उन्हें ‘ताबूतों में वापस आना पड़े.’

अख़बार को अपना नाम ‘शर्मा’ बताने वाले एक छात्र ने कहा, ‘कुछ महीनों पहले ही तमाम मुश्किलों के बाद यहां आने के बाद हम अब वापस नहीं जाने वाले हैं. हम अपनी पढ़ाई पूरी करके ही भारत वापस जाएंगे या अगर इस समय चल रहे युद्ध में मारे गए तो ताबूत में.’

छात्रों का कहना है कि उनके पास वहां रहने के अलावा ‘कोई दूसरा विकल्प नहीं’ है क्योंकि भारत सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे उन्हें देश के चिकित्सा संस्थानों में जगह नहीं दे सकती है.

शर्मा ने कहा, ‘राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने कहा है कि वे ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से प्राप्त डिग्री को वहां अनुमति नहीं देंगे. इन सभी के कारण हमारे पास पाठ्यक्रम को ऑफलाइन तौर पर पूरा करने के लिए यूक्रेन लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था.’

ज्ञात हो कि पिछले महीने केंद्र सरकार ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) अधिनियम, 2019 के तहत किसी भी प्रावधान के अभाव में भारतीय विश्वविद्यालयों में नहीं लिया जा सकता है और इस तरह की कोई भी छूट देने से देश में चिकित्सा शिक्षा के मानकों में गंभीर रूप से बाधा आएगी.

एक अन्य छात्र, जिन्होंने अपना नाम केवल ‘सिंह’ लिखने को कहा, ने बताया, ‘हम लगभग तीन महीने पहले भारत से 70,000 रुपये की फ्लाइट लेकर यहां आए थे, जो सामान्य परिस्थितियों में लगने वाले भाड़े के आधे से भी कम है.’

उत्तराखंड के एक छात्र आशीष नौटियाल घर से ऑनलाइन कक्षाएं ले रहे हैं. उनका कहना है, ‘हम एक नवंबर का इंतजार कर रहे हैं, जब सुप्रीम कोर्ट सरकार से ऑनलाइन मेडिकल पढ़ाई को वैध घोषित करने की मांग वाली याचिका की सुनवाई करेगा.’

उल्लेखनीय है कि बीते 19 अक्टूबर को यूक्रेन में स्थित भारतीय दूतावास ने हमले तेज होते देख एक बयान जारी करते हुए भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द देश छोड़ने और भारतीय नागरिकों को यूक्रेन की यात्रा न करने की भी सलाह दी थी.

बीते सप्ताह भर में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध तेज हो गया है. रूस ने लगभग दो सप्ताह पहले क्रीमिया में हुए एक भीषण विस्फोट के जवाब में यूक्रेन के विभिन्न शहरों को निशाना बनाकर मिसाइल हमले किए.

इससे पहले इस महीने की शुरुआत में आई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया था कि केंद्र सरकार द्वारा यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों को भारतीय कॉलेजों में दाखिला न देने की बात कहने के बाद कई राज्यों से मेडिकल के अंतिम सालों के विद्यार्थी यूक्रेन लौट गए हैं और कई अन्य जाने की योजना बना रहे हैं. छात्रों का कहना था कि उनके पास करिअर बचाने का कोई और विकल्प नहीं है.

गौरतलब है कि रूस के हमले के बाद इस साल की शुरुआत में यूक्रेन से कुल 18,000 छात्रों को निकाला गया था. इनमें करीब 4,500 मेडिकल के फाइनल वर्ष में थे. नियमानुसार राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग केवल विदेशों में ऑफलाइन शिक्षा की स्वीकृति देता है. साथ ही, शैक्षणिक गतिशीलता कार्यक्रम को भी यूक्रेन के सभी विश्वविद्यालयों द्वारा मंजूर नहीं किया गया है.

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