काठमांडू-नेपाल में 26 अगस्त को आए विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों का आंकड़ा 1242 हो चुका है. अभी भी 5 हजार के करीब लोग लापता बताए जा रहे हैं. सबसे बड़ी चिंता उन मजदूरों को लेकर है, जो बाढ़ के मलबे के कारण हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के टनल में फंस गए हैं. ऐसे मुश्किल वक्त में भारत की ओर से मदद का एक खास हाथ आगे बढ़ा है. उत्तराखंड के सिलक्यारा टनल में 41 मजदूरों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाने वाले ‘रैट माइनर्स’ ने नेपाल के रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल होने की पेशकश की है.
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में बाढ़ से कम से कम 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स प्रभावित हुई हैं. इनमें निर्माणाधीन और चालू दोनों प्रोजेक्ट्स शामिल हैं. बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद भारी मात्रा में कीचड़, चट्टानें और मलबा सुरंगों में भर गया है. इससे बचाव दलों के लिए अंदर तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो रहा है. करीब 900 मजदूरों के लापता होने की बात सामने आई है, जबकि लगभग 500 लोगों के सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका जताई जा रही है.
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