भोपाल-मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का मामला एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। जबलपुर हाईकोर्ट द्वारा बीते 9 अक्टूबर को आरक्षण बढ़ाने से जुड़े कानून को असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नई दिल्ली में भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के साथ बैठक की। इसमें अदालत के फैसले के कानूनी पहलुओं और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने और हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक की मांग करने के विकल्प पर विचार कर रही है।इस मामले का असर सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में आरक्षण की व्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए सरकार के अगले कदम पर OBC वर्ग के अभ्यर्थियों, छात्रों और राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने और अंतरिम राहत मिलने के संबंध में अभी अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस मामले का असर सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में आरक्षण की व्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए सरकार के अगले कदम पर OBC वर्ग के अभ्यर्थियों, छात्रों और राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने और अंतरिम राहत मिलने के संबंध में अभी अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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