लंदन, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। मिर्गी के इलाज में काम आने वाली दवा ‘मल्टिपल स्क्लेरॉसिस’ (एमएस) के रोगियों को अंधेपन से बचा सकती है। एक नए अध्ययन में एक भारतवंशी चिकित्सक ने यह खुलासा किया है।
मल्टिपल स्क्लेरॉसिस एक स्व-प्रतिरक्षित (ऑटो-इम्यून) बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाएं शरीर के स्वस्थ कोशिकाओं पर आक्रमण कर उन्हें मार डालती हैं।
निष्कर्ष के मुताबिक मिर्गी की दवा ‘फेंटोइन’ तंत्रिका कोशिकाओं को क्षति से बचाती है, जिससे अंधेपन की समस्या नहीं आ पाती।
ब्रिटेन के लंदन स्थित नेशनल हॉस्पिटल फॉर न्यूरोलॉजी एंड न्यूरोसर्जरी में चिकित्सक राज कपूर के मुताबिक, “एमएस से पीड़ित लगभग आधे लोग जीवन में कभी न कभी ऑप्टिक न्यूराइटिस (आंखों का गंभीर रोग) का सामना करते हैं। इस स्थिति में आंखों को मस्तिष्क से जोड़ने वाली तंत्रिका कोशिकाओं में सूजन आ जाती है।”
कपूर ने कहा, “इस स्थिति में व्यक्ति कुछ समय के लिए अंशत: या पूर्ण अंधा हो सकता है। साथ ही उसे आंखों में भयंकर पीड़ा का भी अनुभव हो सकता है। हालांकि बाद में तंत्रिका कोशिकाओं की स्थिति सुधरने पर आंखों की रोशनी वापस आ सकती है। लेकिन इस तरह कई बार होने से आंख व तंत्रिका कोशिकाएं पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिसके कारण रोगी अंतत: दृष्टिहीन हो जाता है।”
अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने इसके इलाज के लिए मिर्गी की दवा फेंटोइन या प्लेसिबो का इस्तेमाल किया।
शोधकर्ताओं ने तीन महीने के इस्तेमाल के बाद यह पाया कि जिन्हें फेंटोइन दी गई थी, उनकी तंत्रिका कोशिकाओं को प्लेसिबो इस्तेमाल करने वाले रोगियों की तुलना में 30 फीसदी कम क्षति हुई।
कपूर ने उल्लेख किया, “अगर इस निष्कर्ष पर व्यापक अध्ययन किया जाए, तो एमएस के कारण होने वाली तंत्रिका कोशिकाओं की क्षति को रोका जा सकता है।”
यह निष्कर्ष वाशिंगटन में अमेरिकन अकादमी ऑफ न्यूरोलॉजी की 67वीं बैठक के दौरान प्रस्तुत किया गया।
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