अखिलेश सरकार ने पर्चा-पोस्टर पर खर्चे 45 लाख रुपये

इस साल के जनवरी माह में सूबे के मुखिया अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी सरकार के तीन साल की उपलब्धियों बाले पत्रकों का वितरण कराया था। यह पत्रक उत्तर प्रदेश के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रकाशित कराए गए थे। लीगल आकार के रंगीन और ग्लेज्ड पेपर पर आगे और पीछे दोनों और छपे इन पत्रकों में सपा सरकार की तीन साल की 25 ऐसे कोशिशों, इरादों और कामयाबियों को बताने का दावा करते हुए सपा सरकार को महिमामंडित किया गया था।

मई में सामाजिक कार्यकर्ता संजय शर्मा ने एक आरटीआई दायर कर छपवाए गए पत्रकों की संख्या और इन पत्रकों की छपाई पर आए खर्च के बारे में सूचना मांगी थी। इसको लेकर उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के जनसूचना अधिकारी और उपनिदेशक डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी ने 23 जून को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक सैयद अमजद हुसैन का एक पत्र संजय को भेजा।

इस पत्र के अनुसार, अखिलेश यादव ने सपा सरकार की तीन साल की उपलब्धियों का बखान करने वाले 30 लाख पर्चे छपाकर बंटवाए। इस पर 45 लाख रुपये खर्च आया।

साल 2011 में हुई जनगणना के आधार पर यूपी की आबादी 199,812,341 थी और साल 2012 में हुए आम चुनावों में सूबे में 127,492,836 वोटर्स थे। उत्तर प्रदेश में 67.68 प्रतिशत साक्षरता दर के आधार पर हम कह सकते हैं कि सूबे में साक्षर मतदाताओं की संख्या 86,287,151 है।

इन साक्षर मतदाताओं के लिए 30 लाख पत्रक छपवाने का मतलब है कि अखिलेश ने सूबे के हर 29वें साक्षर वोटर के लिए यह पर्चा छपवाया। साल 2012 में हुए आम चुनावों में समाजवादी पार्टी ने कुल पड़े 75,831,682 वोट्स में से 29.15 प्रतिशत यानी 22,104,935 वोट प्राप्त किए थे। इन सपा मतदाताओं के लिए 30 लाख पत्रक छपवाने का मतलब है कि अखिलेश सरकार ने हर 8वें सपा वोटर के लिए यह पर्चा छपवाया।

बताया गया है कि 240928 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले इस सूबे में अखिलेश ने प्रति वर्ग किलोमीटर 12.5 पर्चे बंटवाए।

संजय ने कहा कि अखिलेश सरकार वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में गुपचुप रूप से जुट गई है, वह सरकारी धन से जनता के बीच पैठ बनाना चाह रही है। उन्होंने कहा कि वह अब अपने संगठन के जरिए इस संबंध में मुख्यमंत्री अखिलेश को पत्र लिखकर सपा सरकार को आईना दिखाएंगे।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव स्वयं कई बार कह चुके हैं कि उनकी सरकार काम करने में आगे, लेकिन प्रचार में बेहद पीछे है। शायद यही वजह है कि अब सरकार और उसका पूरा सूचना विभाग प्रचार-प्रसार कर रहा है। कहने को इसे सरकारी योजनाओं की जानकारी आम जनता तक पहुंचाने का नाम दिया गया है, लेकिन पर्दे के पीछे इसे आगामी चुनाव की तैयारी से इनकार नहीं किया जा सकता।

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