नई दिल्ली-केंद्र सरकार ने पहले कहा था कि बायोमेट्रिक आधार सत्यापन (authentication) नहीं कराने वाले घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं की कोई सेवा या लाभ बंद नहीं किया जाएगा. लेकिन अब सरकार ने रियायती कीमत पर एलपीजी सिलेंडर पाने के लिए बायोमेट्रिक आधार सत्यापन अनिवार्य कर दिया है.
यह जानकारी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में दी है. यह आरटीआई पारदर्शिता के लिए अभियान चलाने वाले सेवानिवृत्त कमोडोर लोकेश के. बत्रा ने दायर की थी.
आईओसीएल ने 4 सितंबर 2026 को दिए जवाब में कहा कि घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए ई-केवाईसी केवल एक बार करना जरूरी है और बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा.
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कंपनी के अनुसार, उपभोक्ता किसी भी 10 उंगलियों में से किसी एक के फिंगरप्रिंट, आइरिस या चेहरे के सत्यापन के जरिए यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. फिंगरप्रिंट सेऑथेंटिकेशन में दिक्कत होने पर चेहरे या आइरिस के जरिए ऐसा किया जा सकता है.
आईओसीएल ने अपने जवाब के साथ पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्तियां और इस संबंध में प्रकाशित एक विज्ञापन भी संलग्न किया है.
विज्ञापन के मुताबिक, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के लाभार्थियों को, यहां तक कि वे लोग भी जिन्होंने पहले बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण करा लिया है, लक्षित डीबीटी सब्सिडी का लाभ लेने के लिए हर वित्तीय वर्ष में एक बार यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
यह सब्सिडी 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर पर 300 रुपये है और आठवीं तथा नौवीं रिफिल पर लागू होती है. 5 किलोग्राम के सिलेंडर के मामले में यह 21वीं रिफिल और उसके बाद आनुपातिक रूप से लागू होगी.
विज्ञापन में कहा गया है कि अगर लाभार्थी 31 मार्च तक प्रमाणीकरण पूरा नहीं करता है, तो उस वित्तीय वर्ष में ली गई रिफिल पर रोकी गई सब्सिडी स्थायी रूप से समाप्त हो जाएगी. हालांकि, इसमें यह भी कहा गया है कि बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण नहीं कराने पर एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति या डिलीवरी नहीं रोकी जाएगी. लाभार्थी तय वार्षिक सीमा तक एलपीजी रिफिल बुक कर सकेंगे.
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