उन्होंने कहा कि द्रोणाचार्य, समर्थ रामदास, चाणक्य जैसे कई आचार्य हुए हैं, जिन्हें आज भी उनके योगदान के लिए याद किया जाता है। इन गुरुओं ने शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को संस्कारित भी किया।
मुख्यमंत्री रविवार देर शाम ‘सुशिक्षा छत्तीसगढ़’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य में सुशिक्षा की दिशा में कई प्रयास हुए हैं। शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने तेजी से कदम बढ़ाया है। यहां के युवा राष्ट्रीय स्तर की इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में सफल हो रहे हैं, वहीं संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में सफल हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब छत्तीसगढ़ बना तब यहां 30 हजार स्कूल थे आज इनकी संख्या बढ़कर 60 हजार हो गई है। शिक्षकों की संख्या लगभग दो लाख 40 हजार हो गई है। इनमें से 50 हजार शिक्षक निजी शिक्षा संस्थानों के हैं। राज्य निर्माण के बाद यहां उच्च शिक्षा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। राज्य में आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम और हिदायत उल्ला नेशनल लॉ युनिवर्सिटी जैसे सस्थानों की स्थापना हुई है।
उन्होंने कहा कि मेडिकल कालेज में सीटों की संख्या में बढ़कर एक हजार हो गई है। इसी प्रकार नर्सिग कॉलेजों की संख्या एक से बढ़कर 84 हो गई है। दंतेवाड़ा के एजुकेशन हब की पूरे देश में चर्चा है। राज्य में शिक्षा के माध्यम से बड़ा परिवर्तन आ रहा है। स्कूली शिक्षा पर 12 हजार रुपये से ज्यादा का बजट उपलब्ध कराया गया है।
डॉ. सिंह ने कहा, “माओवादियों ने यहां के लोगों को बंदूक दिया, हमने यहां की नई पीढ़ी को स्टेस्थेस कोप दिया। प्रयास आवासीय विद्यालयों के माध्यम से इन क्षेत्रों के प्रतिभावान बच्चों को बेहतर शिक्षा की व्यवस्था की। इससे इन बच्चों का चयन आईआईटीए मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में परचम लहराया।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल छोड़ने वाले युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए पहल की गई। युवाओं को कौशल विकास का कानूनी अधिकार देने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है। कौशल विकास के लिए सभी 27 जिलों में लाइवलीहुड कालेजों प्रांरभ किए गए हैं इन कालेजों में 2 लाख 90 हजार से अधिक युवाओं को विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षित किया गया है। इन संस्थाओं को देश के अन्य राज्यों के लोग देखने आते हैं।
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