अति-आत्मविश्वास के कारण द. कोरिया से मिली हार : राहुल चौधरी (साक्षात्कार)

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) में तेलुगू टाइटंस टीम के कप्तान के रूप में लोकप्रिय कबड्डी खिलाड़ी राहुल चौधरी का कहना है कि किसी भी चीज की अति ठीक नहीं और अहमदाबाद में जारी कबड्डी विश्व का पहला मुकाबला टीम अति-आत्मविश्वास के कारण हारी।

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) में तेलुगू टाइटंस टीम के कप्तान के रूप में लोकप्रिय कबड्डी खिलाड़ी राहुल चौधरी का कहना है कि किसी भी चीज की अति ठीक नहीं और अहमदाबाद में जारी कबड्डी विश्व का पहला मुकाबला टीम अति-आत्मविश्वास के कारण हारी।

आईएएनएस को अहमदाबाद से फोन पर दिए साक्षात्कार में राहुल ने कहा, “दक्षिण कोरिया के खिलाफ कबड्डी विश्व कप में हम अपना पहला मुकाबला अपनी कमियों के कारण हारे। किसी भी चीज की अति ठीक नहीं और हमें खुद पर अति आत्मविश्वास हो गया था। इसी कारण, हम जीता हुआ मुकाबला आखिरी क्षणों में हार गए।”

राहुल ने कहा कि इस मुकाबले से टीम के सभी खिलाड़ियों को एक सीख मिली है कि किसी भी प्रतिद्वंद्वी को कमजोर समझना बड़ी भूल साबित हो सकती है।

टूर्नामेंट के ग्रुप-ए में दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश, अर्जेटीना, आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के साथ शामिल भारत ने अपने दूसरे मुकाबले में जीत हासिल की। भारत ने दूसरे मुकाबले में कमतर टीम आस्ट्रेलिया को हराया।

राहुल ने कहा कि भारतीय टीम यहां से अपने खेल को इसी प्रकार मजबूत रखेगी।

उन्होंने कहा, “टीम को एकजुट होकर बिना कोई गलती किए अपने इस खेल को आगे तक जारी रखना होगा। हमारे लिए सबसे बड़ा सबक यही है कि किसी भी टीम को कमजोर समझना बेवकूफी होगी, जिसे दोहराना नहीं है।”

कबड्डी के प्रति झुकाव के बारे में राहुल ने कहा कि वह अपने बड़े भाई को देख कर इस खेल में आए। उत्तर प्रदेश के बिजनौर में जन्मे राहुल ने इस खेल के प्रति अपने बड़े भाई से प्रेरणा लेते हुए 13 साल की उम्र में ही कबड्डी को अपना लक्ष्य बना लिया।

कबड्डी में करियर बनाने के बारे में राहुल ने कहा, “भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) में चुने जाने के बाद प्रशिक्षण के लिए जब मुझे गुजरात भेजा गया, तो उस दौरान मुझे पता चला कि इससे नौकरी भी मिल सकती है। मुझे यह जानकर काफी खुशी हुई। मैंने जब यह बात घरवालों को बताई तो, उन्होंने मेरा समर्थन करना शुरू कर दिया।”

असम और मेघालय की संयुक्त मेजबानी में इसी साल हुए दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली कबड्डी टीम का हिस्सा रहे राहुल ने कहा, “कबड्डी न खेलने के दौरान वह अपने बड़े भाई के साथ खेतों में काम करते हैं। घरवाले मना करते हैं, लेकिन इसके बावजूद मुझे खेतों में काम करना अच्छा लगता है।”

गुजरात में साई केंद्र में उन्होंने डिफेंडर का प्रशिक्षण हासिल किया, हालांकि आज वह एक बेतरीन रेडर के रूप में जाने जाते हैं। बेंगलुरू में पिछले साल हुए राष्ट्रीय कबड्डी चैम्पियनशिप में उन्होंने उत्तर प्रदेश की टीम को पहला स्वर्ण पदक दिलाया।

राहुल ने कहा कि कबड्डी में नाम बनाने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की है। दिन में पांच-पांच बार वह इसका प्रशिक्षण लेते थे। हालांकि, अब राहुल की इच्छा अर्जुन पुरस्कार पाने और इस खेल को ओलम्पिक खेलों में शामिल होते देखने की है।

कबड्डी के अलावा उन्हें वॉलीबॉल खेलना अच्छा लगता है और अगर मौका मिला, तो अभिनय के क्षेत्र में भी हाथ आजमाएंगे। हालांकि, अभिनय जगत में जाने में उन्हें कुछ खास दिलचस्पी नहीं है।

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