नई दिल्ली, 12 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली के राजीव चौक स्थित सेंट्रल पार्क में आयोजित ‘अतुल्य भारत’ कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति की विविध विधाओं की प्रस्तुत देखने को मिली, जिनमें शास्त्रीय और लोक नृत्य, संगीत, भारतीय व्यंजन और चित्रकला शामिल हैं। यह आयोजन 12 अगस्त तक चलेगा।
कार्यक्रम की शुरुआत दिल्ली की विधि शर्मा द्वारा भजन एवं सुगम संगीत से हुई, जिसमें विधि ने भजन एवं सूफी गायन किया। उन्होंने कबीर की रचनाएं ‘घूंघट के पट खोल’, एवं सूफी गीत ‘छाप तिलक’ के जरिए सभी का दिल जीत लिया।
विधि ने इस मौके पर कहा कि देश के नागरिकों को अपनी संस्कृति को समझने के लिए समय निकालना चाहिए, क्योंकि दुनिया में भारत आज जो भी है, वह अपनी परंपराओं और संस्कृति की वजह से ही है।
इस प्रस्तुति के बाद सिंधु मिश्रा के दिशानिर्देशन में भरतनाट्यम शिवो प्रस्तुत किया गया, जिसमें 12 कलाकारों ने गणेश वंदना के साथ शुरुआत की।
इस प्रस्तुति के बाद दिल्ली के श्री देवी दुर्गा लाल कथक संस्थान द्वारा कथक बैले प्रस्तुत किया गया, जिसमें करीब आठ कलाकारों ने पहले शिव स्तुति, फिर वर्ष मंगला और फिर तराना पेश किया।
इस प्रस्तुति के साथ साथ गीतांजलि लाल ने युवा पीढ़ी से गुजारिश की कि यदि युवा भारतीय शास्त्रीय संगीत सुनेंगे तो उन्हें दिमाग, शरीर और आत्मा को शांति प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
इसके बाद दिल्ली के दीप सरकार के निर्देशन में करीब 19 कलाकारों ने कथक टेराना पेश किया। इस प्रस्तुति में दिखाया गया कि सेना के जवान हमारे देश के लिए कितनी कड़ी मेहनत करते हैं। अपना घर परिवार छोड़कर कैसे दुश्मनों से लड़ते हैं।
आयोजन में सभी प्रदेशों के लोकनृत्य प्रस्तुत किए गए। असम के 16 कलाकारों ने बिहू एवं वरदोई शिखला नृत्य पेश किया। गुजरात के डांडिया नृत्य में करीब 16 कलाकारों ने प्रस्तुति दी।
इसके बाद छत्तीसगढ़ का लोकप्रिय नृत्य कर्मा पेश किया गया। इसमें फसल काटने का चित्रण झलका। इस प्रस्तुति के बाद कश्मीर का प्रसिद्ध बचनागिमा लोकनृत्य पेश किया गया, जिसमें 15 कलाकारों ने नृत्य किया। यह नृत्य फसल कटाई के समय पर पुरुषों द्वारा किया जाता है।
इस प्रस्तुति के बाद उत्तराखंड कुमाऊ का लोकनृत्य छपेली प्रस्तुत किया गया। छपेली नृत्य कुमाऊं अंचल के त्योहार एवं मांगलिक मौकों पर किया जाने वाला नृत्य है। इस लोक नृत्य में करीब 15 कलाकारों ने हिस्सा लिया।
अंत मे तेलंगाना का प्रसिद्ध लोक नृत्य माथुरी प्रस्तुत किया गया। यह नृत्य श्री कृष्ण की नटखट रासलीलाओं को दर्शाता है, और यह नृत्य जन्माष्टमी के दिन किया जाता है।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के निदेशक फुरकान खान ने सभी कलाकारों के साथ दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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