बेंगलुरू, 10 जून (आईएएनएस)। अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने वाले भारतीय पुरुष टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना ने कहा है कि वह इस समय अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में हैं।
बोपन्ना ने गुरुवार को अपनी कनाडा की महिला जोड़ीदार गैब्रिएला डाब्रोव्स्की के साथ मिलकर साल के दूसरे ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट फ्रेंच ओपन के मिश्रित युगल वर्ग के खिताब पर कब्जा जमाया था।
बोपन्ना ने स्वदेश लौटने के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, “साल की शुरुआत में जीवन नेदुनचेझियान के साथ मैंने चेन्नई ओपन का खिताब जीता था। इसके बाद मार्सिया और मैं दुबई ओपन के फाइनल में पहुंचे। अप्रैल में मैं और पाब्लो कुएवास ने मोंटे कार्लो मास्टर्स का खिताब जीता। इस साल मैंने तीन अलग खिलाड़ियों का साथ खेला है। मुझे उनकी शैली के साथ तालमेल बिठाना पड़ा। मुझे वो तरीका निकलना पड़ा जिससे हम एक दूसरे के साथ खेल सकें।”
उन्होंने कहा, “यह मुख्य कारण है यह कहने का कि मैं इस समय अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में हूं। मैं जब भी कोर्ट पर कदम रखता हूं तो मुझे लगता है कि मैं जीत सकता हूं। इस तरह का आत्मविश्वास मेरे अंदर है।”
सातवीं वरीय बोपन्ना और डाब्रोव्स्की की जोड़ी ने फाइनल में जर्मनी की एना लेना ग्रोनफील्ड और कोलंबिया के रोबर्ट फराह की गैरवरीय जोड़ी को 56 मिनट तक चले मुकाबले में 2-6, 6-2, 12-10 से मात दी थी।
बोपन्ना ग्रैंड स्लैम जीतने वाले चौथे भारतीय खिलाड़ी हैं। उनसे पहले लिएंडर पेस, महेश भूपति और सानिया मिर्जा यह कमाल कर चुके हैं।
इसके अलावा बोपन्ना फ्रेंच ओपन के मिश्रित युगल का खिताब जीतने वाले चौथे भारतीय हैं। भूपति ने सबसे पहले 1997 में जापान की रिका हिराकी के साथ मिलकर यह कमाल किया था। उन्होंने दूसरी बार 2012 में यह कमाल सानिया मिर्जा के साथ किया। पिछले साल पेस ने स्विट्जरलैंड की मार्टिना हिंगिस के साथ यह खिताब जीता था।
भारत के नाम अब 20 मिश्रित युगल ग्रैंड स्लैम खिताब हो गए हैं।
डाब्रोव्स्की ने भी गुरुवार को इतिहास रचा। वह ग्रैंड स्लैम जीतने वाली कनाडा की पहली खिलाड़ी बन गई हैं।
बोपन्ना सात साल बाद किसी ग्रैंड स्लैम के फाइनल में पहुंचे थे। इससे पहले उन्होंने 2010 में पाकिस्तान के एहसान अल कुरैशी के साथ मिलकर अमेरिकी ओपन के फाइनल में प्रवेश किया था लेकिन बॉब और माइक ब्रयान की दिग्गज जोड़ी से हार गए थे।
बोपन्ना ने कहा, “इस समय मुझे कोई घबराहट नहीं होती है। बीते वर्षो ने मुझे बेहतर खिलाड़ी बनाया है। मैं 2010 से बेहतर हो गया हूं।”
उन्होंने कहा, “14 साल पहले पेशेवर करियर की शुरुआत करने के बाद अब अपना पहला गै्रंड स्लैम खिताब जीतना बताता है कि मैंने कभी हिम्मत नहीं हारी। यह मेरी ताकत है। मैं लगातार सही चीजें करता रहता हूं। जब मैं जूनियर था तब मैंने कई टूर्नामेंट हारे। लेकिन मैं हताश नहीं हुआ और लगातार मेहनत करता रहा।”
उन्होंने कहा, “मैंने यह रवैया अपने पेशेवर करियर में भी अपनाया। 14 साल तक ग्रैंड स्लैम न जीतने पर मुझे कोई पछतावा नहीं है। जो चीजें मैंने बीते वर्षो में सीखी हैं उसने मुझे बेहतर खिलाड़ी बनाया है।”
अर्जुन अवार्ड के लिए नामित किए जाने पर बोपन्ना ने कहा, “अर्जुन अवार्ड के लिए नामित होने पर मैं बेहद खुश हूं। एआईटीए ने 2014, 2015 में भी मेरा नाम भेजा था, लेकिन मंजूर नहीं हुआ। इस बार भी इंतजार रहेगा कि क्या होता है।”
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