संयुक्त राष्ट्र, 23 जून (आईएएनएस)। अफगानिस्तान की संसद पर सोमवार को हुए आतंकवादी हमले के कुछ ही घंटों के भीतर भारत ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से वहां खराब होते सुरक्षा हालात के मद्देनजर उस देश से सेना हटाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की।
संयुक्त राष्ट्र, 23 जून (आईएएनएस)। अफगानिस्तान की संसद पर सोमवार को हुए आतंकवादी हमले के कुछ ही घंटों के भीतर भारत ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से वहां खराब होते सुरक्षा हालात के मद्देनजर उस देश से सेना हटाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि अशोक कुमार मुखर्जी ने सुरक्षा परिषद में कहा, “अफगानिस्तान में राजनीतिक परिवर्तन जिस संकटपूर्ण स्थिति में है और सुरक्षा हालात जो खराब हुए हैं, उन्हें देखते हुए हमें लगता है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को अफगानिस्तान से सेना हटाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।”
उन्होंने अफगानिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून की हालिया रपट का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल सशस्त्र संघर्षो में 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि 71 प्रतिशत हिंसक घटनाएं दक्षिणी, दक्षिण-पूर्वी तथा पूर्वी क्षेत्रों में हो रही हैं।
मुखर्जी के मुताबिक, इस रपट से हमारे इस विचार को बल मिलता है कि अफगानिस्तान में असुरक्षा एवं अस्थिरता का मुख्य कारण आतंकवाद है, न कि कबायली मतभेद या प्रतिद्वंद्विता।
उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल (आईएसएएफ) ने अफगानिस्तान में अपना अभियान पिछले साल के आखिर में औपचारिक तौर पर समाप्त कर दिया है। किसी समय आईएसएएफ के 1,40,000 जवान अफगानिस्तान में थे, लेकिन अब इनकी संख्या कुछ हजारों तक सिमट कर रह गई है।
अफगानिस्तान में केवल 12,000 ऐसे विदेशी सैनिक रह गए हैं, जो रिजोल्यूट सपोर्ट मिशन के तहत अफगान सुरक्षा कर्मियों को युद्ध कौशल का परामर्श और प्रशिक्षण उपलब्ध कराते हैं।
मुखर्जी ने अफगानिस्तान में आतंकवादी वारदातों के लिए पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा, “बान की रपट में अफगानिस्तान सरकार के आंकड़ों के हवाले से देश में 7,180 विदेशी लड़ाके होने की बात कही गई है। निश्चित तौर पर ये अफगानिस्तान की सीमा से बाहर से मिले सहयोग के बगैर यहां नहीं पहुंचे और अपना आतंकवादी हमला बरकरार रखने में सक्षम हैं।”
अफगानिस्तान की खराब आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए मुखर्जी ने यह भी कहा कि यह देश मध्य एशिया और दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ने में ‘सेतु’ का काम कर सकता है।
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