अब बिना चीनी मिलाए खाएं मीठा दही

लंदन, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। दुग्ध उत्पादों में अलग से चीनी मिलाने के कारण स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग इन्हें खाने से बचते हैं। लेकिन अब डेनमार्क के शोधकर्ताओं ने मीठी दही जमाने में सफलता पाई है।

शोधकर्ताओं के दल ने दही जमाने वाली बैक्टीरिया के चयापचय गुण में बदलाव लाकर प्राकृतिक रूप से उसे मीठा बनाने में कामयाबी हासिल की है।

इसके अलावा शोधकर्ताओं ने सूक्ष्यजीवविज्ञानी तरीकों के उपयोग से दही के लैक्टोस को पूरी तरह निकालने का तरीका भी ढूंढ निकाला है। तो अब वे लोग भी मजे से दही खा सकेंगे, जिन्हें दुग्ध उत्पाद पचता नहीं है।

डेनमार्क की बहुराष्ट्रीय बॉयोसाइंस कंपनी हेंसन होल्डिंग के उपाध्यक्ष व शोधकर्ता एरिक जोहानसन का कहना है, “हमारा लक्ष्य यह था कि दही में पाई जाने वाली बैक्टीरिया ग्लूकोज को न पचा पाए, जो कि चीनी का ही एक मीठा रूप है और किण्वन उत्पाद है। हम चाहते थे कि वे ग्लूकोज को खाएं लेकिन वापस ग्लूकोज ही निकालें।”

यह शोध एप्लाइड एंड एनवायरोनमेंटल माइक्रोबायलॉजी में प्रकाशित किया गया है।

जोहानसन आगे कहते हैं, “इसका कारण यह है कि ग्लूकोज लैक्टोस या गैलेक्टोस के मुकाबले अधिक मीठा होता है। इसलिए दही के बैक्टीरिया ग्लूकोज खाकर लैक्टोस निकालने की बजाए जब ग्लूकोज निकालते हैं तो दही मीठा हो जाता है और उसमें अलग से चीनी मिलाने की जरूरत नहीं पड़ती।”

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