समाचार एजेंसी ‘एफे’ के अनुसार, बलुआ पत्थर से बनी यह प्रतिमा सुदूरवर्ती कोह केर मंदिर के प्रसात छेन अभयारण्य से चुराई गई थी और बाद में न्यूयॉर्क की डोरिस वीनर गैलरी को बेच दी गई थी। इसे 1986 में डेनवर आर्ट म्यूजियम ने खरीद लिया था।
कंबोडिया के राज्यमंत्री चान तानी ने कहा, “मूर्ति का स्वेच्छा से लौटाया जाना कंबोडियाई संस्कृति के कोह केर युग के महत्व के प्रति संग्रहालय की संवेदनशीलता को दर्शाता है।”
बीते एक दशक से अधिक समय में विदेशों में स्थित संग्रहालयों ने कंबोडिया को उसकी सदियों पुरानी कई मूर्तियां लौटाई हैं। अपनी मूर्तियां वापस पाने के लिए कंबोडिया की सरकार कानूनी लड़ाई भी लड़ रही है, जिसे यूनेस्को का समर्थन प्राप्त है।
कंबोडिया में यूनेस्को की प्रतिनिधि ऐनी लेमैस्ट्रे ने कहा, “कोह केर युग की मूर्तियों को पहचानना बहुत आसान है, क्योंकि इस युग की मूर्तियां बहुत बड़ी और बहुत सुस्पष्ट होती हैं।”
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