वाशिंगटन, 25 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका में हाल में हुई गोलीबारी की घटना ने बंदूक पर नियंत्रण के मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। वहीं, मीडिया रपटों के मुताबिक 2015 में अब तक सार्वजनिक स्थानों पर गोलीबारी के 204 मामले सामने आ चुके हैं।
वाशिंगटन, 25 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका में हाल में हुई गोलीबारी की घटना ने बंदूक पर नियंत्रण के मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। वहीं, मीडिया रपटों के मुताबिक 2015 में अब तक सार्वजनिक स्थानों पर गोलीबारी के 204 मामले सामने आ चुके हैं।
लुसियाना प्रांत के लफायत स्थित एक सिनेमाघर में एक श्वेत व्यक्ति ने गुरुवार रात गोलीबारी की, जिसमें ‘ट्रेनरेक’ फिल्म का प्रदर्शन चल रहा था। इस घटना में दो महिलाओं की मौत हो गई और नौ घायल हो गए। यह छह सप्ताह के अंदर गोलीबारी की तीसरी बड़ी घटना थी।
लफायत पुलिस प्रमुख जिम क्रेग ने कहा कि कथित बंदूकधारी जॉन रसेल ह्युजर (59) ने अलबामा से वैध रूप से बंदूक खरीदा था, उसने 10 चक्र गोलियां चलाई, जिसमें 11 लोगों को गोली लगी।
राज्य के भारतवंशी गवर्नर बॉबी जिंदल ने कहा, “गोली बहुत ही सुव्यवस्थित तरीके से चलाई गई थी। एक बार में सभी को गोली नहीं मारी गई थी।”
समाचार पत्र ‘वाशिंगटन पोस्ट’ के मुताबिक, लुसियाना की घटना से पहले 2015 में सार्वजनिक स्थान पर गोलीबारी के 203 मामले सामने आ चुके हैं।
अप्रैल में 18, मई में 39, जून में 41 और जुलाई में 34 मामले सामने आए हैं।
लुसियाना में गुरुवार को हुई गोलीबारी की घटना के साथ यह इस राज्य में आठवीं घटना है। ओहियो में 10, कैलिफोर्निया में 14 और न्यूयार्क में गोलीबारी की 16 घटना सामने आ चुकी है।
समाचार पत्र सवाल करता है, “क्या कोई बदलाव आएगा?” यह खुद जवाब देते हुए कहता है कि शायद नहीं है। इसने कहा है कि साउथ कैरोलिना के चार्ल्सटन में श्वेत व्यक्ति ने एक गिरिजाघर में नौ लोगों की जान ले ली।
पोस्ट कहता है, “इसने एक राष्ट्रीय चर्चा शुरू कर दी है जो न सिर्फ बंदूक के बारे में बल्कि अपराधियों के झंडे को लेकर भी है, जिसे बंदूकधारियों ने अपने नस्लभेदी मान्यता को लेकर अपनाया है।”
न्यूयार्क टाइम्स कहता है, “छह सप्ताह के अंदर तीसरी घटना हो गई, लेकिन राष्ट्रपति पद के दावेदारों का रवैया ऐसा है जैसे उन्होंने कुछ देखा ही नहीं है।”
अधिकांश लोग जहां गोलीबारी की निंदा कर रहे हैं और मृतकों के लिए प्रार्थना की अपील कर रहे हैं, वहीं राष्ट्रपति पद के किसी भी दावेदार ने बंदूक से होने वाली हिंसा के खिलाफ कोई नीति पेश नहीं की है।
अखबार ने कहा कि यह उस सच को दिखाता है कि बंदूक संबंधी कानून राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
समाचार पत्र यह भी कहता है कि रिपब्लिकन उम्मीदवार बंदूक पर रोक लगाने के प्रयास के पूरी तरह खिलाफ ही लगते हैं।
उन्होंने बंदूक नियंत्रण को लेकर प्रस्ताव पेश किए हैं, लेकिन वे बंदूक से होने वाली हिंसा की जगह अर्थव्यवस्था, नस्ल, लिंग के मुद्दे पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
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