सैन फ्रांसिस्को, 31 दिसम्बर (आईएएनएस)। अमेरिका में गिरजाघरों पर लगातार हमले हो रहे हैं लेकिन अमेरिकी सरकार, राजनैतिक नेताओं और मीडिया द्वारा इनकी अनदेखी की जा रही है। इनका ध्यान भारत और अन्य जगहों पर होने वाली ऐसी ही घटनाओं पर अधिक रहता है।
सैन फ्रांसिस्को, 31 दिसम्बर (आईएएनएस)। अमेरिका में गिरजाघरों पर लगातार हमले हो रहे हैं लेकिन अमेरिकी सरकार, राजनैतिक नेताओं और मीडिया द्वारा इनकी अनदेखी की जा रही है। इनका ध्यान भारत और अन्य जगहों पर होने वाली ऐसी ही घटनाओं पर अधिक रहता है।
आईएएनएस ने 26 नवंबर (थैंक्सगिविंग डे) से लेकर 25 दिसंबर (क्रिसमस) के बीच के एक महीने में अमेरिका के स्थानीय मीडिया का सर्वेक्षण किया। आईएएनएस ने पाया कि इस दौरान गिरजाघरों पर हमले की 45 घटनाएं हुईं। इनमें पवित्र प्रतिमाओं में तोड़फोड़ से लेकर गोलीबारी तक की घटनाएं शामिल थीं।
इन 45 में से पांच को छोड़कर बाकी किसी को भी राष्ट्रीय मीडिया में जगह नहीं मिली। न्यूयार्क टाइम्स ने ईसा मसीह के जन्म से जुड़ी झाकियों पर सिलसिलेवार हमलों की पांच रपट प्रकाशित कीं। इनके अलावा अन्य घटनाओं को अखबार में जगह नहीं दी गई।
कैथलिक लीग फार रेलीजस एंड सिविल राइट्स के अध्यक्ष विलियम डोनोहू ने कहा, “अमेरिकी मीडिया मस्जिदों पर हमलों को जिस तरह कवर करता है, वही बात गिरजाघरों पर हमलों में नहीं दिखती। मीडिया ईसाई विरोधी धर्माधता के मुकाबले मुस्लिम विरोधी धर्माधता को लेकर अधिक संवेदनशील है। यह स्कूलों में बहुसंस्कृतिवाद का भी फल है जहां इस्लाम को बढ़ावा दिया गया है और ईसाईयत को नीचा दिखाया गया है।”
स्थानीय मीडिया में प्रकाशित रपटों के आधार पर आईएएनएस ने पाया कि हमलों की वजहें अलग-अलग थीं। गिरजाघरों के बीच के धार्मिक मतभेद, श्वेत-अश्वेत के बीच का रंगभेद, नस्लवाद, ईसाई धर्म का अराजकतावादियों और शैतान के पूजकों द्वारा विरोध से लेकर सीधे आपराधिक तत्वों की कार्रवाई तक इनमें शामिल हैं।
जोसफ राशर नाम के एक कैथलिक पादरी ने पेनसिलवेनिया के विल्केस-बार्रे के एक स्थानीय टीवी चैनल से कहा, “दुर्भाग्य से हम जानते हैं कि बड़ी संख्या में लोग अब धर्म और इसकी मान्यताओं को अहमियत नहीं देते।” राशर के गिरजाघर पर 22 दिसंबर को हमला हुआ था जिसमें मदर मैरी की प्रतिमा को गिरा दिया गया था।
अमेरिका स्थित यूनिवर्सल सोसाइटी आफ हिंदुइज्म ने गिरजाघरों पर हमलों की निंदा की है। संस्था के अध्यक्ष राजन जेड ने कहा कि सभी धर्म शांति और प्रेम की शिक्षा देते हैं। अपनी तमाम पारंपरिक भिन्नताओं के बावजूद हमें आपस में प्रेम, सौहार्द और विश्वास से जीना सीखना चाहिए।
ईसाई मतावलंबियों में एक समूह धार्मिक प्रतिमाओं का विरोधी है। यह इसे मूर्ति पूजा बताता है। कैथलिक गिरजाघरों में इन प्रतिमाओं पर हमले होते रहते हैं। मिशिगन के लिवोनिया में एक संत की प्रतिमा को खंडित कर दिया गया और नारा लिख दिया गया था-रोम विल फाल (रोम का पतन होगा)। यह रोमन कैथलिकवाद के विरोध में था।
शैतान के पुजारियों के संप्रदाय भी गिरजाघरों पर हमले करते हैं। न्यूजर्सी के ग्लासबोरो में दो प्रोटेस्टेंट और रूढ़िवादी गिरजाघरों पर हमले किए गए और इन पर ‘666’ लिख दिया गया जिसे शैतान का चिन्ह माना जाता है।
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