नई दिल्ली, 6 मई (आईएएनएस)। भारत में अमेरिकी राजदूत रिचर्ड वर्मा ने बुधवार को भारत में गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के संचालन में आने वाली चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की। रिचर्ड ने अमेरिकी एनजीओ फोर्ड फाउंडेशन के खिलाफ जारी सरकारी जांच के मद्देनजर चिंता जाहिर की।
अनंता एस्पेन इंस्टीट्यूट में फाउंडेशन ऑफ द यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक प्लस रिलेशनशिप कार्यक्रम में अमेरिकी राजदूत ने कहा, “मैंने भारत में एनजीओ के परिचालन के संबंध में हाल ही में जारी कुछ रपटों को पढ़ा है जिसमें चिंता जाहिर की गई है।”
उन्होंने कहा, “एक जीवंत समाज हम दोनों लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए महत्वपूर्ण है। एनजीओ को ध्यान में रखकर उठाए गए नियामक कदमों को लेकर मैं चिंतित हूं।”
वर्मा ने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें आशा है कि वह अपने आधिकारिक और अनाधिकारिक दोस्तों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति और समझौते करने में सफल रहेंगे। उन्होंने कहा, “लेकिन मैं यह भी जनता हूं कि कई बार ऐसा भी समय होगा जब हम असहमत होंगे, हम उन पर भी बातचीत के लिए तत्पर हैं।”
उन्होंने कहा, “यह एक सुझाव है कि जब भी हम सुधार की दृष्टि से बातें और चर्चाएं करते हैं तो लोकतांत्रिक परंपराएं को मजबूत होती हैं।”
उन्होंने कहा, “इसीलिए हम चिंतित करने वाले सभी मामलों पर खुलकर चर्चा कर अपने द्विपक्षीय संबंधों में लचीलापन ला सकते हैं।”
सरकार ने मंगलवार को कहा था कि फोर्ड फाउंडेशन ने कुछ ऐसे गैर सरकारी संगठनों को धन उपलब्ध कराया है जो कि विदेशी सहायता नियमन कानून (एफसीआरए) 2010 के तहत पंजीकृत नहीं है। इसके अलावा फोर्ड फाउंडेशन पर तीस्ता सीतलवाड़ से जुड़े सबरंग ट्रस्ट को भी धन उपलब्ध कराने का आरोप है।
केंद्रीय गृहराज्य मंत्री किरण रिरिजू ने लोकसभा में कहा, “खुफिया एजेंसियों से यह जानकारी मिली है कि फोर्ड फाउंडेशन की ओर से कुछ धन ऐसे गैर सरकारी संगठनों को हस्तांतरित किया गया है जो कि विदेशी सहायता नियमन कानून (एफसीआरए) 2010 के तहत पंजीकृत नहीं है।”
उन्होंने कहा, “इसीलिए इस तरह से धन एकत्रित करने वालों पर नजर रखने के लिए सरकार ने फोर्ड फाउंडेशन से क्रेडिट को एफसीआरए के तहत पूर्व अनुमति श्रेणी में डाल दिया गया है।”
dharmpath.com dharmpath