मालूम हो कि दलित स्टूडेन्ट्स यूनियन कई दिनों से विश्वविद्यालय में संसद द्वारा पारित दलित छात्रों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का विरोध करने वाले 22 कर्मचारियों की बर्खास्तगी व डा. कमल जायसवाल और रिपुसूदन सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की मांग को लेकर धरना दे रहा है। समिति के नेताओं ने दलित छात्रों की सभी मांगों का समर्थन करते हुए यह मुद्दा भी उठाया कि कुलसचिव डा. सुनीता चन्द्रा को अविलम्ब उनके पद का पूर्ण प्रशासनिक अधिकार बहाल किया जाए।
समिति के नेताओं ने कहा कि जब से केन्द्र में भाजपा की सरकार आयी है तब से चाहे दलित छात्रों से जुड़ा कोई मामला हो या कार्मिकों से जुड़ा हो, सभी पर भाजपा की शह पर दलित समाज का उत्पीड़न कराया जा रहा है।
समिति ने कहा कि डा. सुनीता चन्द्रा अनुसूचित जाति की एक ईमानदार कुलसचिव हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन में कुछ आरक्षण विरोधी कार्मिक व प्रोफेसर उन्हें जानबूझकर परेशान कर रहे हैं, जिसके लिए पूरी तरह विश्वविद्यालय के कुलपति जिम्मेदार हैं। जिनके द्वारा संवैधानिक व्यवस्था पर कुठाराघात कराया जा रहा है।
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