नेपेडा, 28 जून (आईएएनएस)। म्यांमार की राष्ट्रीय सलाहकार और विदेश मंत्री आंग सान सू की ने मंगलवार को सशस्त्र जातीय समूहों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की।
समचार एजेंसी ‘एफे’ के मुताबिक, सू की ने सभी जातीय आतंकवादियों के साथ जुलाई के अंत में एक ’21वीं सदी के पांगलोंग सम्मेलन’ का प्रस्ताव रखा है। इनमें कम से कम चार ऐसे आतंकवादी भी शामिल हैं, जिन्होंने राष्ट्रव्यापी संघर्ष विराम समझौते (एनसीए) पर अभी तक हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
संघीय सरकार के साथ एक समझौते के तहत अल्पसंख्यकों द्वारा कब्जे में किए गए सीमांत क्षेत्रों के लिए अनुमति प्रदान करने के लिए पांगलोंग समझौते पर पहली बार 1947 में बर्मा की सरकार और शान, कचिन और चिन (जातीय समूहों) के बीच समझौता हुआ था।
पीएनएलओ के एक बयान के मुताबिक, ‘जातीय सशस्त्र संगठन शांति प्रक्रिया संचालन दल’ (ईएओपीपीएसटी) का गठन मार्च में हुआ था, जिसमें करेन राष्ट्रीय संघ (केएनयू) और पा-आई राष्ट्रीय मुक्ति संगठन (पीएनएलओ) समेत आठ हस्ताक्षरकर्ता शामिल थे। ईएओपीपीएसटी ने सेना से राजनीतिक वार्ता में गैर हस्ताक्षरकर्ताओं को भी शामिल करने का खुलेआम आग्रह किया है।
म्यांमार के चार प्रमुख जातीय सशस्त्र समूहों ने संघर्ष विराम पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
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