आंत दुरुस्त तो मन भी चंगा

नई दिल्ली, 16 जून (आईएएनएस)। एक शोध से पता चला है कि आंत और मस्तिष्क में गहरा संबंध है। आपकी आंत दुरुस्त रहे तो मस्तिष्क भी सही तरीके से काम करता है और आपका मानसिक स्वास्थ्य ठीक रहता है। अवसाद या कोई और मनोरोग नहीं सताता।

मस्तिष्क का 60 प्रतिशत हिस्सा वसा से बना होता है, इसीलिए जिस तरह की वसा को आप आहार में शामिल करेंगे, मस्तिष्क वैसा ही परिणाम देगा। मस्तिष्क का स्वास्थ्य ओमेगा 3 फैटी एसिड के सेवन से सुधरता है। यानी स्वस्थ मस्तिष्क के लिए स्वास्थ्यप्रद भोजन भी जरूरी है।

हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल कहते हैं, “शारीरिक स्वास्थ्य पर फल और सब्जियों के फायदेमंद प्रभाव देखे जाते हैं। कई शोधों में पौष्टिक आहार के फायदों की पुष्टि हुई है।”

उन्होंने कहा, “गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट को अब हमारे ‘दूसरे मस्तिष्क’ के रूप में लिया जाता है। रीढ़ की हड्डी की तुलना में आंत में 50 करोड़ से अधिक न्यूरॉन्स होते हैं। इसलिए अपनी आंत को दुरुस्त रखने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।”

डॉ. अग्रवाल के मुताबिक, “आंत एक बुद्धिमान संवेदनात्मक अंग है, जो बहुत सारी जानकारियां मस्तिष्क को वापस भेजता है। आंत में रहने वाले विभिन्न बैक्टीरिया की 300 से 600 प्रजातियां प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने, मेटाबोलिज्म, पाचन व न्यूरोट्रांसमिशन में सहायता करने और कई फायदेमंद कार्यों का प्रदर्शन तथा मस्तिष्क को सिग्नलिंग जैसे काम करती हैं।”

उन्होंने कहा कि एक सही और स्वास्थ्यप्रद आहार वह सबसे अच्छा उपहार है, जिसे आप शरीर और मस्तिष्क को दे सकते हैं। अच्छा खाना-पीना सही दिशा में सकारात्मक कदम साबित हो सकता है।”

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