मुंबई, 30 जून (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना के पहले पोत आईएनएस विक्रांत का स्मारक स्थापित करने के फैसले ने यहां विवाद का रूप ले लिया है।
‘सेव विक्रांत कैम्पेन’ से जुड़े एक मुख्य कार्यकर्ता किरन पैगानकर ने ऐसे स्मारक की जरूरत और इसके लिए प्रस्तावित स्थान पर सवाल उठाया है, जो भारतीय नौसेना के पश्चिमी कमांड के मुख्यालय के नजदीक लायन गेट स्थित ट्रैफिक आईलैंड में बनाया जाएगा।
बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने सोमवार को स्मारक निर्माण की घोषणा की है।
वर्षो से इस अभियान से जुड़े रहे पैगानकर ने आईएएनएस को बताया, “हम इस बात पर गौर करने में नाकाम रहे हैं कि अत्यधिक सुरक्षा वाले क्षेत्र के नजदीक एक छोटे से स्थान पर ऐसे स्मारक की जरूरत क्या है जो कि आम लोगों से दूर रहेगा और सुरक्षा में अड़चनें पैदा करेगा।”
उन्होंने कहा कि इसके अलावा अभी यह रहस्य ही है कि टूटे हुए जहाज रखे जाने वाले स्थान से निकाले गए दो टन धातु से इसे कैसे बनाया जाएगा।
पैगानकर ने कहा, “अगर वे उस वृहद जहाज की प्रतिकृति बनाना चाहते हैं, तो यह उस उत्कृष्ट पोत के साथ न्याय नहीं होगा, जिसने दशकों तक देश की सुरक्षा में योगदान दिया।”
इसके बदले में उन्होंने यह सुझाव दिया कि भारतीय नौसेन को जहाज के बड़े धातु वाले नेम प्लेट को स्मारक का रूप दे देना चाहिए, जो लंबी दूरी वाले स्थान से आसानी से देखा जा सकेगा।
पैगानकर ने कहा कि नेम प्लेट ‘आईएनएस विक्रांत’ बहुत बड़ा है और उसे शहर के किसी उपयुक्त स्थान पर स्थापित किया जा सकता है, जहां बीएमसी के सुझाए अत्यधिक सुरक्षित स्थान की अपेक्षा पर्यटकों तथा आम लोगों के लिए पहुंच आसान है।
बीएमसी की प्रवर समिति के अध्यक्ष यशोधर फनसे ने इस प्रस्ताव को अप्रैल में पेश किया था, जिसे सभी नेताओं की बैठक में मंजूरी दे दी गई।
सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी कोमोडोर एम. भड़ा ने आईएनएस विक्रांत के दो टन धातु और सामग्री खरीदे थे, जिसे पिछले साल जहाज से निकाला गया था। इसके साथ ही भारतीय इतिहास का एक युग समाप्त हो गया।
मशहूर धातु मूर्तिकार अरजान खमबाटा जहाज का मॉडल उसी धातु और सामग्री से तैयार करेंगे।
संयोगवश, नौसेना के पूर्व चालक भड़ा ने 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में जहाज से चलाए गए अभियान को देखा था। अब उन्होंने स्मारक बनाने के लिए कार्पोरेट से मदद लेने का फैसला किया है।
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