कोलकाता, 28 जून (आईएएनएस)। भारतीय फुटबाल खिलाड़ियों के संघ (एफपीएआई) ने बुधवार को कहा कि देश के अधिकतर फुटबाल खिलाड़ी अगले महीने होने वाले इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के पांचवें संस्करण के ड्राफ्ट में शामिल नहीं होना चाहते, लेकिन उनके पास कोई अन्य विकल्प भी नहीं है।
एफपीएआई के महाप्रबंधक सायरस कन्फेक्शनर ने आईएएनएस को बताया, “इस ड्राफ्ट की दो समस्याएं हैं। पहली समस्या यह है कि इससे खिलाड़ियों को उचित धनराशि नहीं मिलेगी और दूसरी समस्या यह है कि न तो उन्हें अपनी पसंदीदा टीम चुनने का अधिकार होगा और न ही उन्हें टीम के साथ वेतन को लेकर मोल-भाव करने का विकल्प होगा।”
गौरतलब है कि आईएसएल के प्रत्येक फ्रेंचाइजियों के पास खिलाड़ियों की खरीदारी के लिए अधिक से अधिक 17-18 करोड़ रुपये का बजट है।
सायरस ने बताया कि हाल ही में अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ (एआईएफएफ) अवार्डस के बाद हुई बैठक में एआईएफएफ के अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने ड्राफ्ट के खिलाफ बोला था।
उन्होंने कहा, “लेकिन एक सप्ताह बाद ही हमें बताया गया कि ड्राफ्ट होने वाले हैं। अगर अध्यक्ष ही अपनी बात पर कायम नहीं रहते हैं, तो हम कर ही क्या सकते हैं।”
उन्होंने कहा, “भारत के 80 से 90 फीसदी खिलाड़ी ड्राफ्ट का हिस्सा नहीं बनना चाहते। खिलाड़ियों के लिए स्थिति न उगलने वाली और न निगलने वाली बन गई है। हो सकता है कि आईएसएल क्लब, ईस्ट बंगाल और मोहन बागान को छोड़कर, आई-लीग क्लब से ज्यादा पैसा दें। अगर आईएसएल की आयोजक संस्था फुटबाल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (एफएसडीएल) उन्हें ड्राफ्ट में शामिल होने को मजबूर करती है तो उनके पास कोई विकल्प नहीं बचेगा।”
भारतीय फुटबाल टीम के कप्तान सुनील छेत्री, मोहन बागान के पूर्व कप्तान रेनेडी सिंह, भारतीय टीम के कप्तान रह चुके और एफपीएआई के पूर्व अध्यक्ष बाइचुंग भूटिया ड्राफ्ट के विरोध में हैं। वहीं रिलायंस स्पोर्ट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर रमन ने कहा है कि वह इस मामले को देखेंगे।
लेकिन ड्राफ्ट जुलाई के मध्य में होने हैं, ऐसे में इस पर विचार करना दूर की कौड़ी लगता है।
हालांकि आईएसएल में मैदान पर उतरने वाली किसी टीम के अंतिम एकादश में भारतीय खिलाड़ियों की संख्या के इजाफे की एफपीएआई की शर्त को मान लिया गया है। लीग के अगले संस्करण में कोई भी टीम अधिकतम पांच विदेशी खिलाड़ियों के साथ मैदान पर उतर सकेगी।
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