बगदाद, 27 मार्च (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून शनिवार को इराक की राजधानी बगदाद पहुंचे। उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना था कि वित्तीय संकट से उबरने और आईएस के साथ लड़ाई में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इराक के साथ है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, बान के साथ विश्व बैंक के अध्यक्ष जिम योंग किम और इस्लामिक विकास बैंक के अध्यक्ष अहमद अल-मदनी भी थे। बगदाद हवाईअड्डे पर इन लोगों का स्वागत इराकी विदेश मंत्री इब्राहिम अल जाफरी ने किया। प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी से मिलने से पहले इन लोगों ने विदेश मंत्री जाफरी के साथ बैठक की।
अबादी और आगंतुक अधिकारियों ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य आईएस के साथ लड़ाई और तेल मूल्य में गिरावट से उत्पन्न वित्तीय संकट से उबरने में इराक की मदद करना है।
बिना विस्तृत जानकारी दिए अबादी ने संवाददाताओं से कहा, “मैंने आगंतुक उच्च अधिकारियों से सुना है कि इराक की मदद करने की अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की योजनाएं हैं, जो अगले सप्ताह से मूर्त रूप लेंगी।”
अबादी और जाफरी के साथ बैठक के बाद बान ने कहा, “हमारी यात्रा सफल रही। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के साथ बैठक में हम लोगों ने सुरक्षा, राजनीति, अर्थव्यवस्था और इराक में मानवाधिकारों पर चर्चा की।”
बान ने इराक से अन्य समुदायों, खासतौर पर सुन्नी समुदाय के लोगों से मेल-मिलाप शुरू करने का आग्रह किया, क्योंकि इस समुदाय के लोग शिया नीत सरकार में अलग-थलग पड़ गए हैं। नतीजा है कि आईएस इसका नाजायज फायदा उठा रहा है।
विश्व बैंक के अध्यक्ष ने संवाददाताओं से कहा कि इराक के जो क्षेत्र आईएस के कब्जे से मुक्त हुए हैं, वहां कुछ ज्यादा ही प्रशासनिक और आर्थिक सुधार करने की जरूरत है। इस उद्देश्य के लिए उन्होंने 25 करोड़ डॉलर देने की घोषण भी की।
इस्लामिक बैंक के प्रमुख ने भी आईएस के कब्जे से मुक्त हुए क्षेत्रों में पुनर्निर्माण कार्य में ठोस भूमिका निभाने पर सहमति जताई।
संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के बाद बान और मदनी इराकी संसद में भी गए। इराकी संसद को संबोधित करते हुए बान ने कहा, “आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई इराक के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। लेकिन इसकी जड़ पर ध्यान दिए बिना आतंकवाद को केवल सैन्य शक्ति के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता है।”
बान की इराक यात्रा ऐसे समय में हुई है, जब देश एक ओर आर्थिक संकट के बीच भ्रष्टाचार से निपटने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ जून, 2014 में उत्तरी और पश्चिमी इलाकों पर आईएस का कब्जा होने के बाद से लगातार हिंसा का सामना कर रहा है।
इराकी बजट 90 प्रतिशत तेल से प्राप्त आय पर निर्भर करता है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत गिरने से उसकी अर्थव्यवस्था भयानक संक ट में पड़ गई है।
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