नई दिल्ली, 20 दिसम्बर (आईएएनएस)। प्रथम सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की नई संशोधित 10 पृष्ठीय विवरणिका व्यवहार में 16 पृष्ठ की बन गई है।
सेबी ने एक अधिसूचना के जरिए पुरानी 48 पृष्ठों वाली आईपीओ विवरणिका को 10 पृष्ठों का बना दिया है। यह अधिसूचना एक दिसंबर, 2015 से लागू हो गई है।
हाल में नारायण हृदयालय, एल्केम लैबोरेटरीज और लाल पैथ लैब्स के आए आईपीओ की विवरणिका हालांकि 16 पृष्ठों की है।
इन आईपीओ की मुख्य विवरणिका 12 पृष्ठों की है, जिसमें आखिरी दो पृष्ठ सादे छोड़ दिए गए हैं। सादे पृष्ठों पर पृष्ठ संख्या अंकित नहीं है।
प्रमुख शेयर सलाहकार और लेखक तथा मुंबई की कंपनी क्रिस सिक्युरिटीज (केजरीवाल रिसर्च एंड इनवेस्टमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड) के संस्थापक तथा निदेशक अरुण केजरीवाल ने कहा, “हालांकि यह रोचक है कि यहां तक तो कंपनियों ने 10 पृष्ठों के प्रारूप का पालन किया है।”
ऐसा किया जाना स्वाभाविक है, क्योंकि 10 पृष्ठों के दस्तावेज को बीच में नत्थी नत्थी नहीं किया जा सकता है। स्थापित वैश्विक चलन के मुताबिक दस्तावेजों का प्रकाशन चार पृष्ठों के गुणक में होता है, खासकर तब जब इसे बीच में नत्थी करनी हो। अन्यथा इसे ऊपर बाईं तरफ नत्थी करनी होती है।
इसके अलावा एक मुद्दा यह है कि 10 पृष्ठों की विवरणिका प्रपत्र में बिडिंग केंद्रों की सूची देने के लिए स्थान नहीं दिया गया है, जो निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण सूचना है। इसकी वजह से आईपीओ जारी करने के लिए कंपनियों ने मुख्य 12 पृष्ठों के साथ चार अतिरिक्त पृष्ठ नत्थी कर दिए हैं। ताकि आवेदन पत्र सही जगह पर जमा किए जाएं।
इस तरह विवरणिका में कुल 16 पृष्ठ हो गए।
इसके अलावा नई विवरणिका में ‘एप्लीकेशंस सपोर्टेड बाई ब्लॉक्ड अमाउंट’ (एएसबीए) के लिए निर्धारित बैंक शाखाओं के विवरण भी नहीं हैं, जबकि सेबी की वेबसाइट पर बहुधा पूछे जाने वाले सवालों की सूची (एफएक्यू) में कहा गया है कि यह विवरण विवरणिका में होगा।
केजरीवाल ने कहा, “10 पृष्ठीय विवरण से यही पता चलता है कि आईपीओ आवेदन पत्र के लिए नई विवरणिका तैयार करने वाले सेबी के अधिकारियों ने दिमाग का इस्तेमाल नहीं किया है।”
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