नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। इस साल 92 फीसदी कारोबारी अपने उत्पादों की ब्रिकी बढ़ाने के लिए एक प्रभावकारी मार्केटिंग अभियान लांच करने के पक्ष हैं। उनका मानना है कि प्रभावकारी मार्केटिंग और ब्रांड के प्रति उपभोक्ताओं में जागरूकता लाने से बिक्री बढ़ाने में मदद मिल सकती है। एक सर्वेक्षण के नतीजों में इसका खुलासा किया गया है।
सव्रेक्षण में 89 फीसदी कारोबारी जोरदार मार्केटिंग अभियान के प्रभाव से वाकिफ थे और 62 फीसदी सामाजिक रूप से प्रभाव डालने की दिशा में अपने बजटीय खर्च को बढ़ाने की योजना बना रहे थे।
ब्रांडेड उत्पादों के प्रति ग्राहकों का रुझान बढ़ने से कंपनी अपने उत्पादों का प्रचार करने पर ज्यादा जोर दे रही है क्योंकि ग्राहक ब्रांड देखकर खरीदारी के फैसले लेते हैं। प्रभावकारी मार्केटिंग के बढ़ते चलन से प्रतीत होता है कि यह उत्पादों के प्रोत्साहन की रणनीति यानी मार्केटिंग मिक्स के सिद्धांत का अभिन्न अंग बन गया है।
जेफमो की ओर से इंडिया इन्फ्लूएंस रिपोर्ट 2018 नाम से करवाए गए सर्वेक्षण से जाहिर होता है कि भारत में प्रभावकारी मार्केटिंग धीरे-धीरे जोर पकड़ रही है। अल्पकाल में इसे ज्यादा लाभकारी मानने वाले 14 फीसदी कारोबारी हैं जबकि 16 फीसदी कारोबारी अपनी मार्केटिंग रणनीति में इसे शामिल करने की योजना बना रहे हैं। प्रभावकारी मार्केटिंग मैक्रो और माइक्रो अर्थात बड़े अथवा छोटे दोनों स्तरों पर असरदार पायी गई है।
जेफमो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी इरफान खान ने कहा, “उत्पादों का आक्रामक प्रचार करने वालों के पास महती विश्सनीयता होती है और उनका माध्यम मौलिक रूप से सामाजिक होता है। साथ ही, ब्रांड का प्रचार करके वो अपनी विश्वसनीयता उस उत्पाद के साथ जोड़ देते हैं। आक्रामक मार्केटिंग के आंकड़ों से जाहिर होता है कि 2018 में ब्रांड ज्यादा परिष्कृत हो जाएंगे।”
इसके तहत प्रोडक्ट लांच को 56 फीसदी प्रभावकारी बताया गया है, जबकि कंटेंट प्रोमोशन को 54 फीसदी। वहीं, इवेंट प्रमोशन 40 फीसदी असरदार रहा है।
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