संयुक्त राष्ट्र, 28 मार्च (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून ने शुक्रवार को कहा कि लीबिया में अल्पसंख्यक समुदाय और धार्मिक स्थलों पर इस्लामिक स्टेट (आईएस) समूह के हमले से धार्मिक रूप से अल्पसंख्यक लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की शनिवार की रिपोर्ट के अनुसार, बान ने मध्य-पूर्व में हमले और जातीय व धार्मिक आधार पर किए जा रहे उत्पीड़न के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में खुली चर्चा के दौरान कहा कि लीबिया में सभी पक्षों को संघर्ष समाप्त कर जल्द एक समझौते पर पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि देश को आतंकवादियों के हाथ में जाने से बचाना पड़े।
बान ने इराक और सीरया में अल्पसंख्यक समुदाय की दशा का उल्लेख करते हुए कहा, “हमें मतभिन्नता पर प्रकाश डालना छोड़ना होगा और विविधता तथा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के मूल्यों को दोहराना होगा।”
उन्होंने कहा, “अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सरकार और सभी पक्षों की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन हम नागरिक समाज के साझीदारों, धार्मिक नेताओं और अन्य प्रभावशाली लोगों के साथ मिलकर काम करेंगे।”
सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष देश फ्रांस ने मध्य-पूर्व में अल्पसंख्यकों की दशा पर पहली बार चर्चा की पहल इसी महीने की थी। यह चर्चा मध्य-पूर्व में ईसाइयों को लक्ष्य कर किए जा रहे हमले के बाद शुरू हुई है।
फ्रांस के विदेश मंत्री लॉरेंट फैबियस चर्चा में शामिल हुए। उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि मध्य-पूर्व से अल्पसंख्यकों के पूरी तरह गायब हो जाने का खतरा है।
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