नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने बुधवार को संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट को कॉरपोरेट समर्थक बताया और कहा कि इसने संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था पर नरेंद्र मोदी सरकार के अगंभीर दृष्टिकोण को जाहिर कर दिया है।
भाकपा ने यह भी कहा कि वित्तमंत्री अरुण जेटली गैरनिष्पादित परिसंपत्तियों के सुधार के लिए कोई प्रस्ताव पेश नहीं कर पाए हैं, जिनके कारण राष्ट्रीयकृत बैंक दिवालिएपन की स्थिति में पहुंच गए हैं, और इसी समस्या के कारण विमुद्रीकरण जैसा कदम उठाना पड़ा।
भाकपा ने कहा, “वित्तमंत्री आत्महत्या कर रहे किसानों को कोई राहत नहीं दे पाए हैं। बैंक ऋण की सीमा तो बढ़ा दी गई, लेकिन किसानों के ऋण माफ करने के लिए कोई आश्वासन नहीं दिया गया, जो कि आत्महत्या का मुख्य कारण है।”
भाकपा ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने पागलपन के हद तक जाकर शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र के निजीकरण का कदम उठाया है।
पार्टी ने कहा है, “इस बजट ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को और कमजोर करने का संकेत दिया है। विनिवेश अपेक्षाकृत अधिक जोरशोर से किया जाएगा। सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को खत्म करने पर तुली हुई है। विदेशी निवेश अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में प्रवेश करेगा, क्योंकि एफडीआई के नियम और उदार होने जा रहे हैं।”
भाकपा ने राजनीतिक दलों को नकदी चंदा स्वीकारने की सीमा 20,000 रुपये से घटाकर 2,000 रुपये करने के प्रस्ताव को भी सरासर मूर्खतापूर्ण करार दिया।
भाकपा ने कहा, “हमें चुनाव सुधार करना चाहिए और राजनीतिक दलों को आरटीआई के दायरे में लाया जाना चाहिए।”
भाकपा ने आगे कहा है, “कुल मिलाकर केंद्रीय बजट देश की संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था पर नरेंद्र मोदी सरकार के अगंभीर दृष्टिकोण को जाहिर करता है।”
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