नई दिल्ली, 31 जनवरी (आईएएनएस)। आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 में तेज पुनर्मुद्रीकरण, कर दरों, स्टांप शुल्कों में कटौती और अत्यधिक कर लगाने की नीति से देश एक बार फिर विश्व की सर्वाधिक तेज अर्थव्यवस्था बन सकता है।
केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने संसद में सर्वेक्षण पेश करते हुए कहा कि पुनर्मुद्रीकरण की लागत अल्पकालीन थी, लेकिन उससे लंबी अवधि के लिए लाभ रखा गया।
सर्वेक्षण के मुताबिक, “इन गतिविधियों से विकास 2017-18 के रुझान की ओर लौटेगा, जिससे देश विश्व की सर्वाधिक तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था बनेगा।”
सर्वेक्षण में कहा गया है कि 2016-17 में घरेलू नीति से संबंधित दो प्रमुख घटनाक्रम हुए, जिसमें से एक संविधान संशोधन से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का मार्ग प्रशस्त होना और दूसरा नोटबंदी रहा।
सर्वेक्षण के मुताबिक, “जीएसटी से साझा घरेलू बाजार का सृजन होगा, कर अनुपालन और सुशासन में सुधार होगा और निवेश एवं विकास बढ़ेगा। यह देश के सहकारी संघवाद के सुशासन में एक नया बदलाव भी है।”
इस सर्वेक्षण में यह भी कहा गया कि इस साल देश ने कई वैधानिक उपलब्धियां हासिल की हैं, जिसमें दिवालियापन कानून में सुधार करना भी है।
dharmpath.com dharmpath