नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने मंगलवार को कहा कि सरकार इंटरनेट उपयोग में भेदभाव नहीं रखना चाहती है।
इंटरनेट निरपेक्षता पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए प्रसाद ने राज्यसभा में कहा, “सरकार देश के सभी नागरिकों के लिए इंटरनेट उपयोग में समानता का अधिकार सुनिश्चित करना चाहती है।”
उन्होंने कहा, “इंटरनेट निरपेक्षता पर चल रही बहस को इस नजरिए से देखा जाना चाहिए।”
मंत्री ने यह भी कहा कि इस पर आखिरी फैसला सरकार ही लेगी।
उन्होंने राज्यसभा में कहा, “परामर्श पत्र का जो भी निष्कर्ष हो, लेकिन फैसला सरकार ही लेगी।”
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने एक परामर्श पत्र जारी कर इंटरनेट उपयोगकर्ताओं और कंपनियों से इस मुद्दे पर राय मांगी है कि ओवर द टॉप सेवाओं का नियमन किस प्रकार किया जाए। इस पर सलाह देने की आखिरी तारीख 24 मई थी, जबकि जवाबी तर्क रखने की आखिरी तिथि आठ मई तय की गई है।
दूरसंचार विभाग की एक छह सदस्यीय समिति भी इस मुद्दे पर अध्ययन कर रही है, जो मई के मध्य तक रपट पेश करेगी।
मंत्री ने कहा, “इंटरनेट मानव मस्तिष्क की एक सर्वोत्तम रचना है, इसका उपयोग मानव हित में होना चाहिए।”
इंटरनेट निरपेक्षता से मतलब यह है कि सरकार और इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों को इंटरनेट पर सभी प्रकार के डाटा के साथ समान बर्ताव करना चाहिए। इसका तात्पर्य यह है कि उपयोगकर्ताओं, सामग्रियों, प्लेटफार्म, वेबसाइटों, एप्लीकेशनों या संचार के रूपों से अलग-अलग प्रकार से शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए।
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