इओवा से शुरू होती है व्हाइट हाउस जाने वाली सड़क

वाशिंगटन, 31 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका में राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनने के लिए डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी के दावेदारों ने कवायद भले ही काफी पहले से शुरू कर दी हो लेकिन सही मायने में व्हाइट हाउस तक पहुंचने की दौड़ सोमवार को इओवा से शुरू हो रही है।

वाशिंगटन, 31 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका में राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनने के लिए डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी के दावेदारों ने कवायद भले ही काफी पहले से शुरू कर दी हो लेकिन सही मायने में व्हाइट हाउस तक पहुंचने की दौड़ सोमवार को इओवा से शुरू हो रही है।

भारत में आम तौर से पार्टियों में नेता अपने बीच से किसी को नामांकित कर देते हैं। लेकिन, अमेरिका की द्विदलीय व्यवस्था में आम मतदाताओं को काकसों या पार्टी बैठकों और प्राइमरी में प्रत्याशी चयन का हक होता है। राष्ट्रपति पद प्रत्याशी के नामांकन का पहला चुनाव इओवा में होता है जहां करीब ढाई लाख मतदाता हैं।

इओवा में स्कूलों, गिरजाघरों, आम घरों जैसी जगहों पर बनाए गए 1774 मतदान केंद्रों पर मतदाता एकत्र होते हैं, प्रत्याशियों के चयन पर बात करते हैं और फिर इन प्रत्याशियों के प्रतिनिधियों को चुनते हैं। ये प्रतिनिधि जुलाई में होने वाले पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी का चुनाव करते हैं।

जिन मतदाताओं ने खुद को डेमोक्रेट या रिपब्लिकन मतदाता के रूप में पंजीकृत करा रखा है, वे अपने-अपने काकस में जाते हैं। गैरपंजीकृत आजाद मतदाता दोनों में से किसी के पास भी जा सकते हैं।

इओवा में डेमोक्रेटिक पार्टी के 52 प्रतिनिधि और रिपब्लिकन पार्टी के 30 प्रतनिधि चुने जाते हैं।

इओवा के अलावा 12 राज्यों और दो अमेरिकी क्षेत्रों में भी काकस प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है।

बाकी के 37 राज्यों में प्रत्याशियों का चुनाव करने वाले इनके प्रतिनिधियों के चयन के लिए प्राइमरी प्रणाली पर अमल किया जाता है। इनमें से 14 में ‘ओपेन प्राइमरी’ होते हैं जिनमें मतदाताओं को किसी भी दल से संबद्ध होने की जरूरत नहीं होती।

अधिकांश राज्यों में यह व्यवस्था है कि जो प्रतिनिधि निर्वाचित हुए हैं, पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में कानूनी रूप से वे किसी एक प्रत्याशी का ही समर्थन करेंगे। लेकिन, कुछ राज्य ऐसे भी हैं जो आनुपातिक रूप से प्रतिनिधियों का बंटवारा करते हैं।

इसके साथ ही, रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही पार्टियों में कुछ पदाधिकारियों को यह हक हासिल होता है कि वे जिसे चाहें उसे पार्टी का प्रत्याशी बनाने के पक्ष में मत दें। जब दो दावेदारों के बीच मुकाबला काफी कड़ा होता है, तो इन पदाधिकारियों का मत निर्णायक बन जाता है।

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