इलेक्ट्रानिक कचरे को निपटाने में ओडिशा बहुत पीछे

elecभुवनेश्वर, 5 अगस्त (आईएएनएस)| ओडिशा इलेक्ट्ऱॉनिक कचरे की समस्या से जूझ रहा है। सालाना 7000-8000 टन इलेक्ट्रानिक कचरा पैदा करने वाले राज्य में इसे खत्म करने या इसे रिसाइकिल करने की कोई व्यवस्थित प्रणाली अब तक अस्तित्व में नहीं आई है।

ओडिशा पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड ने 43 उत्पादकों को इस मामले में नोटिस भेजा है। इनमें इंटेक्स, एल.जी., सैमसंग, वोडाफोन, हिताची, सुकैम, ब्लूस्टार, माइक्रोमैक्स जैसी कंपनियां शामिल हैं।

नोटिस में इन कंपनियों से पूछा गया है कि अपनी उम्र खो चुके उपकरणों को एकत्र करने के लिए राज्य में इन्होंने अब तक कितने संग्रह केंद्र बनाए हैं।

2011 में बने इलेक्ट्रानिक कचरे के निपटारे के नियमों के मुताबिक यह उत्पादकों की जिम्मेदारी है कि वे किसी काम के नहीं रह गए उपकरणों से पैदा हुए इलेक्ट्रानिक कचरे को उन जगहों पर नष्ट करने या रिसाइकिल करने के लिए भेजें जो पंजीकृत होते हैं।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक डी.के. बेहरा ने आईएएनएस को बताया, ” अभी तक 19 उत्पादकों ने नोटिस का जवाब दिया है। हम सभी के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें कचरे को रिसाइकिल करना ही होगा, नहीं तो पर्यावरण पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा।”

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संस्था ने राज्य में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के लिए 13 संग्रह केंद्रों को अधिकृत किया है लेकिन अभी भी राज्य में कोई रिसाइकलिंग इकाई अस्तित्व में नहीं आई है।

पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड ने 851 संस्थाओं से पूछा है कि उन्होंने अपने इलेक्ट्रॉनिक कचरे को निपटाने का क्या प्रबंध किया है। इनमें बैंक, कालेज, अस्पताल, होटल, सॉफ्टवेयर कंपनियां आदि शामिल हैं।

पर्यावरण के जानकारों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक कचरे को नदी-नाले में फेंकने से पानी और भूमि प्रदूषित हो रहे हैं। यह सेहत के लिए बहुत घातक साबित हो सकता है।

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