उन्होंने कहा कि विपक्षी उम्मीदवारों का पर्चा खारिज कर उन्हें चुनाव प्रक्रिया से बेदखल कर दिया गया। भाजपा ने इस तरह सहकारी संस्थाओं में अपने अध्यक्ष और प्रतिनिधि निर्विरोध की नौटंकी कर निर्वाचित कराए हैं।
पटेल ने आईपीएन से बातचीत में कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने में सहकारिता आंदोलन की प्रमुख भूमिका है, लेकिन जिस तरह से भाजपा सरकार ने इसको कमजोर करने का तरीका अपनाया है, वह लोकतंत्र के लिए घातक है।
उन्होंेने कहा कि भाजपा ने सहकारी संस्थाओं के चुनाव जीतने के लिए तानाशाही रवैया अपनाया है। इसे किसी भी तरह स्वीकार नहीं किया जा सकता।
पटेल ने कहा कि जब समाजवादी सरकार थी, तो सहकारिता की संस्था को मजबूत करने के लिए निष्पक्ष चुनाव की व्यवस्था थी, जिसे भाजपा ने ध्वस्त कर दिया। सपा ने किसानों और दस्तकारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए सहकारी आंदोलन को आगे बढ़ाया था, जिसको भाजपा ने अपने राजनीतिक स्वार्थ खातिर चौपट कर दिया।
उन्होंेने कहा, “दरअसल भाजपा के लोगों को न किसान से मतलब है और न दस्तकारों से, उन्हें तो बस अपना राजनीतिक स्वार्थ साधना और अपनी जेब भरना है।”
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