उप्र चुनाव : मानिकपुर सीट पर आपस में भिड़ेंगे बसपा के 2 पूर्व मंत्री

चित्रकूट, 26 जनवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड के चित्रकूट जिले की मानिकपुर सीट में अबकी बार चुनावी मुकाबला बड़ा रोचक होगा। यहां बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की पूर्ववर्ती सरकार के दो पूर्व मंत्री आमने-सामने भिड़ेंगे और मतदाताओं के बीच एक-दूसरे की बखिया भी उधेड़ेंगे।

चित्रकूट, 26 जनवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड के चित्रकूट जिले की मानिकपुर सीट में अबकी बार चुनावी मुकाबला बड़ा रोचक होगा। यहां बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की पूर्ववर्ती सरकार के दो पूर्व मंत्री आमने-सामने भिड़ेंगे और मतदाताओं के बीच एक-दूसरे की बखिया भी उधेड़ेंगे।

चित्रकूट जिले की मानिकपुर सीट 2012 के विधानसभा चुनाव से पूर्व अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी, अब यह सामान्य हो गई है। यहां बसपा के टिकट पर दलित नेता दद्दू प्रसाद तीन बार विधायक रहे और पूर्ववर्ती मायावती सरकार में वह ग्राम्य विकास मंत्री भी रह चुके हैं। 2012 के चुनाव में बसपा ने दद्दू प्रसाद की जगह चंद्रभान पटेल को टिकट दिया था और वह चुनाव जीते भी।

इसी बीच दद्दू प्रसाद ने नई पार्टी ‘बहुजन मुक्ति पार्टी’ (बीएमपी) बनाई और इस बार वह मानिकपुर सीट से खुद की पार्टी से चुनाव मैदान में हैं। हाल ही में बसपा छोड़कर गए पूर्व सांसद आर.के. पटेल को भी इसी सीट से भाजपा ने मैदान में उतारा है। बसपा के दोनों पूर्व दिग्गज आपस में ‘लंगोटिया यार’ हैं। इस सीट पर बसपा से निवर्तमान विधायक चंद्रभान पटेल और सपा-कांग्रेस गठबंधन से संपत पाल भी मैदान में हैं।

आर.के. पटेल को 1993 में दद्दू प्रसाद ही राजनीति में लाए थे और खुद मानिकपुर व पटेल कर्वी सदर सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ थे। लेकिन दोनों ही चुनाव हार गए थे। 1996 के चुनाव में दोनों बसपा से ही चुनाव लड़े और एक साथ जीते भी।

मायावती ने आर.के. पटेल को कैबिनेट मंत्री बनाया था। वर्ष 2002 के चुनाव में भी दोनों बसपा से ही विधायक बने, लेकिन 2007 में बसपा ने पटेल का टिकट काटकर दिनेश मिश्रा को लड़ाया तो वह बागी होकर सपा में चले गए, लेकिन दद्दू तीसरी बार बसपा से चुनाव जीत कर मायावती सरकार में ग्राम्य विकास मंत्री बने। पटेल 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा के टिकट से बांदा-चित्रकूट सीट से सांसद चुन लिए गए।

इधर, 2012 के विधानसभा चुनाव में मानिकपुर सीट सामान्य हुई तो बसपा ने दद्दू का टिकट काटकर चंद्रभान पटेल को लड़ाया। इस चुनाव के बाद दद्दू को बसपा ने बाहर का रास्ता दिखाया और एक बार पटेल फिर घर वापसी करते हुए बसपा में शामिल हो 2014 में लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन मोदी लहर के चलते भाजपा के भैरो प्रसाद मिश्र से हार गए।

इस बार दद्दू प्रसाद ने नई ‘बहुजन मुक्ति पार्टी’ बनाकर मानिकपुर से मैदान में उतरे तो आर.के. पटेल भाजपा में शामिल हो इसी सीट से ताल ठोक दी।

राजनैतिक और सामाजिक दृष्टि से ब्राह्मण और कुर्मी बिरादरी के बीच चित्रकूट जिले में हमेशा छत्तीस के आंकड़े रहे हैं। भाजपा ने कर्वी सदर से ब्राह्मण कौम से चंद्रिका उपाध्याय और पहली बार जिले की किसी सीट से कुर्मी उम्मीदवार आर.के. पटेल को उतारा है। करीब डेढ़ दशक तक यहां ‘दलित-कुर्मी’ (डीके) गठजोड़ चलता रहा, अब भाजपा ने ‘ब्राह्मण-कुर्मी’ (बीके) गठजोड़ का नया प्रयोग शुरू किया है।

अब देखना होगा कि भाजपा का यह नया प्रयोग कितना सफल होता है। चुनावी परिणाम कुछ भी रहे, लेकिन कभी लंगोटिया यार रहे बसपा के दो पूर्व दिग्गज दद्दू और पटेल इस चुनाव में आमने-सामने हैं और मतदाताओं के बीच दोनों जहां बसपा प्रमुख मायावती की पोल खोलेंगे, वहीं एक-दूसरे की बखिया भी उधेड़ने से नहीं चूकेंगे।

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