ग्रामीणों के मुताबिक, इसुली गांव में सूर्याबाई (50) ने बैंक से खेतीबाड़ी के लिए किसान क्रेडिट कार्ड बनवाकर 70 हजार रुपये कर्ज लिया था, मगर सूखे के कारण फसलें दगा दे गईं। सात बीघा जमीन की मालकिन होते हुए भी वह अन्न के लिए तरस रही थी।
सूर्याबाई के पति हरनारायण यादव की पहले ही मौत हो चुकी है। वह
कर्ज चुकता करने की चिंता में डूबी रहती थी। उसकी रातों की नींद गायब थी। शनिवार देर रात उसने घर में फांसी लगा ली, जिससे उसकी मौत हो गई। पड़ोसियों को रविवार सुबह उसकी मौत का पता चला।
ग्रामीणों ने सुमेरपुर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
इससे पहले, सुमेरपुर थाना क्षेत्र के ही इंगोहटा गांव में आर्थिक तंगी से जूझ रहे अवध नरेश उर्फ अल्हू सविता निवासी इंगोहटा ने कर्जदारों के तगादे से परेशान होकर रविवार सुबह अपने घर में बनी अटारी में अपनी ही साफी से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
इसी क्षेत्र के विदोखर मेदनी गांव में भी पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य देवकी नंदन दीक्षित (35) ने गरीबी के दंश से तंग आकर फांसी लगाकर जान दे दी थी।
सुमेरपुर कस्बे के बांकी निवासी सुरेंद्र (30) ने भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। जिले में आर्थिक तंगी से हो रही लगातार मौतों को लेकर जिले में चलाए जा रहे सूखा राहत कार्यक्रम पर सवाल उठने लगे हैं।
पिछले चौबीस घंटे में एक महिला किसान समेत तीन किसानों की आत्महत्या की खबर से प्रशासन में हड़कंप मचा है।
जिलाधिकारी उदयवीर सिंह यादव ने रविवार को इंगोहटा गांव जाकर मृत किसानों के परिजनों को ढांढस बंधाया और एक बोरा खाद्यान्न मुहैया कराकर फौरी तौर पर राहत दी।
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