उप्र : बाघिन के हमलों से ग्रामीणों में खौफ

ग्रामीणों की संख्या अधिक होने के कारण वह गन्ने के खेत में जा छिपी। गांव कृपाकुंड निवासी दयाराम के बेटे संदीप और कुलदीप की सुबह करीब पांच बजे मवेशी चराने सिंगाही निघासन रोड के पूरब ओर सरयू नदी के किनारे स्थित शीशम के सिसवारा गए थे। धूप हो जाने के कारण वह लोग मवेशियों से कुछ दूरी पर बैठे आपस में बातें कर रहे थे।

इसी बीच मवेशी अचानक चिल्लाते हुए भाग पड़े। मवेशियों को भगाते हुए देखकर वह लोग उनकी ओर दौड़े। उन्होंने देखा कि बाघिन भैस के एक बच्चे के पीछे हिस्से का मांस निकालकर खा रही है। बाघिन को देखकर वे जमीन पर डंडा पटकते हुए शोर मचाने लगे। शोर सुनकर बाघिन भैंसे के बच्चे को छोड़कर चरवाहों की ओर दौड़ी। व लोग शोर मचाते हुए भागने लगे। शोर सुनकर खेतों में कार्य कर रहे लोग भी आ गए। काफी संख्या में लोगों के आने पर बाघिन गन्ने के खेत में चली गई।

सूचना मिलने पर वाचर समेत वन विभाग के लोग वहां पहुंच गए, लेकिन बाघिन नहीं दिखी।

सिंगाही और निघासन थाना क्षेत्र में बाघिन की दहशत 11 फरवरी से है। मुशीगढ़ और चखरा गांव में बाघिन ने दो बच्चों को घायल किया था। इसके अलावा तीन बकरी और एक मवेशी को अपना शिकार बना चुकी है। बाघिन के होने के कारण लोग खेतो की ओर जाने से कतरा रहे हैं। खेत में लगी गन्ना, धान आदि की फसल पानी और खाद बीज के सूख रही है।

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