उप्र : मिशन-2017 में होगी ‘पीके’ के कौशल की परीक्षा

लखनऊ , 12 मार्च (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा चुनाव में अपने चुनावी प्रबंधन का हुनर दिखा चुके ‘पीके’ उर्फ प्रशांत किशोर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को संजीवनी देने में जुटे हैं। प्रदेश में कांग्रेस के लिए करिश्माई नेतृत्व की तलाश में लगे पीके के कौशल की परख उप्र के विधानसभा चुनाव 2017 में हो जाएगी। पीके के सामने चुनौती चुनावी जंग में लगातार पिट रही कांग्रेस को पटरी पर लाने की है।

लखनऊ , 12 मार्च (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा चुनाव में अपने चुनावी प्रबंधन का हुनर दिखा चुके ‘पीके’ उर्फ प्रशांत किशोर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को संजीवनी देने में जुटे हैं। प्रदेश में कांग्रेस के लिए करिश्माई नेतृत्व की तलाश में लगे पीके के कौशल की परख उप्र के विधानसभा चुनाव 2017 में हो जाएगी। पीके के सामने चुनौती चुनावी जंग में लगातार पिट रही कांग्रेस को पटरी पर लाने की है।

उप्र में कांग्रेस इस समय अपने बुरे दौर से गुजर रही है। वर्ष 1996 विधानसभा के चुनाव को छोड़ दें तो कांग्रेस वर्ष 1993 से अब तक उप्र में लगातार हार का स्वाद चखती आ रही है। पिछले चार चुनावों में पार्टी उप्र में 30 का आंकड़ा भी नहीं पार कर सकी है।

उप्र में कांग्रेस अपने परंपरागत वोट बैंक दलित-मुस्लिम-ब्राहमण को कभी एकजुट नहीं कर पाई है। सत्ता से दूरी और लगातार चुनाव हारने से कार्यकर्ताओं का मनोबल भी टूटा हुआ है। एक के बाद एक गठबंधन भी कांग्रेस को पटरी पर नहीं ला सका।

कांग्रेस के एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि पीके के लिए उप्र में कांग्रेस को विधानसभा चुनाव जिताने की राह आसान नही होने वाली है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती कार्यकर्ताओं को नए सिरे से खड़ा करना है।

उन्होंने कहा, “उप्र में संगठन को खड़ा करना सबसे बड़ी चुनौती है। कार्यकर्ता पूरी तरह से निराश हैं। यहां टिकटों के बंटवारे के दौरान भी काफी अनियमितता बरती जाती है। बाहर से यहा दूसरी पार्टी से आए नेताओं को टिकट पकड़ा दिया जाता है, जिससे लंबे समय से पार्टी में रह रहे कार्यकर्ता का मनोबल और टूटता है।”

उन्होंने कहा कि वर्ष 1996 में बसपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के बाद पार्टी प्रदेश में दोबारा खड़ी नहीं हो पाई। पंचायतों व निकायों के चुनाव में भी पार्टी हाशिये पर पहुंच गई।

उप्र की मडिहान विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक ललितेश पति त्रिपाठी ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान हालांकि यह कहा कि अभी यह कह पाना जल्दबाजी होगी कि प्रशांत किशोर के जुड़ने से इसका कितना असर संगठन पर पड़ेगा, लेकिन इतना तो तय है कि परिस्थतियां बदलेंगी और कांग्रेस एक बार फिर उठ खड़ी होगी।

त्रिपाठी ने कहा, “यह तो सच है कि प्रशांत किशोर को अपने साथ जोड़ने के लिए उप्र की बाकी पार्टियां भी जुटी हुई थीं। कांग्रेस के साथ जुड़ने के बाद उनमें भी दहशत का माहौल है। इसका फायदा संगठन को जरूर मिलेगा। राहुल गांधी व प्रशांत किशोर के साथ मिलकर हर कांग्रेसी उप्र में कड़ी मेहनत करेगा और इसका सकारात्मक परिणाम भी मिलेगा।”

गौरतलब है कि आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को लगभग 11 प्रतिशत मत मिले थे। वर्ष 2007 में 8़8 प्रतिशत, 2002 में 8़9 प्रतिशत, 1996 में 29़1 प्रतिशत वोट मिले थे। ये आंकड़े बताते हैं कि उप्र में कांग्रेस को पटरी पर लाने के लिए प्रशांत किशोर के कौशल की भी परीक्षा होनी है।

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