ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक प्रदेश में 12.79 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जबकि महाराष्ट्र में 12.27, कर्नाटक में 4.16 और गुजरात में 1.51 लाख मीट्रिक टन। शुगर रिकवरी के मामले में भी उप्र आगे चल रहा है। प्रदेश की औसत रिकवरी 9.80 प्रतिशत है, जबकि महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह क्रमश: 9.10 एवं 8.61 प्रतिशत है।
प्रमुख सचिव ने कहा कि वर्तमान सत्र में अब तक संचालित 109 चीनी मिलों द्वारा 130.55 लाख टन गन्ने की पेराई कर 12.79 लाख टन चीनी का उत्पादन किया जा चुका है और औसत चीनी रिकवरी 9.80 प्रतिशत है। जबकि गत वर्ष इस तिथि तक 101 चीनी मिलों द्वारा 84.10 लाख टन गन्ने की पेराई कर 8.19 लाख टन चीनी बनाई गई थी, तथा चीनी रिकवरी 9.74 प्रतिशत थी।
भूसरेड्डी ने बताया कि शासन की शीर्ष प्राथमिकता के अनुसार गन्ना किसानों को त्वरित गन्ना मूल्य भुगतान कराने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके फलस्वरूप पेराई सत्र 2017-18 में देय गन्ना मूल्य 2054.07 करोड़ रुपये का भुगतान अब तक सुनिश्चित कराया जा चुका है, जबकि गत वर्ष इस तिथि तक मात्र 467.23 करोड़ रुपये का ही गन्ना मूल्य भुगतान हो सका था।
उन्होंने कहा कि अबतक गत वर्ष किए गए गन्ना मूल्य के भुगतान के सापेक्ष 1586.84 करोड़ रुपये अधिक का भुगतान कराया गया है।
dharmpath.com dharmpath