उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रदेश की गरीब, बेरोजगार व त्रस्त जनता को महंगी बिजली देना भाजपा के सुशासन व ‘सबका विकास’ की रणनीति है?
मायावती ने शनिवार को अपने बयान में कहा, “उप्र में शहर से लेकर गांव तक महंगी बिजली का बोझ जनता पर आज से डाल दिया गया है। यह कोई मामूली बोझ नहीं है, बल्कि शहरी क्षेत्र के घरेलू उपभोक्ताओं को भी अब 10 रुपये प्रति किलोवाट अधिक फिक्स चार्ज देने के साथ-साथ 40-50 पैसे प्रति यूनिट ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा। कुल मिलाकर सभी श्रेणियों में औसतन लगभग 13 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।”
उन्होंने कहा, “एक तो उप्र में बिजली का काफी ज्यादा बुरा हाल है और लोग काफी ज्यादा परेशान हैं, उस पर से बिजली दरों में बढ़ोतरी की मार। वास्तव में यह भाजपा सरकार प्रदेश की गरीब जनता के लिए ‘करेला वह भी नीम का कोट चढ़ा’ वाली कड़वी सरकार साबित हो रही है।”
मायावती ने कहा, “प्रदेश में बिजली व सड़क, पानी, अस्पताल, सफाई के साथ-साथ अपराध नियंत्रण व कानून-व्यवस्था जैसी जनता की बुनियादी जरूरतों के मामले में प्रदेश का काफी ज्यादा बुरा हाल है, क्या यही भाजपा का सुशासन है?”
उन्होंने कहा, “इसकी जवाबदेही न केवल प्रदेश भाजपा सरकार की है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की भी है, क्योंकि स्थानीय सांसद होने के साथ-साथ उन्होंने ही प्रदेश में भाजपा सरकार बनने पर जनता की सुख-सुविधाओं का ध्यान देने के नाम पर लोगों से वोट मांगा था, लेकिन अब वे जनता का ख्याल रखने के लिए आगे आने के बजाय अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ते हुए नजर आ रहे हैं।”
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