उप्र में सफल नहीं हो रहा ई-मंडियों का फार्मूला

लखनऊ, 15 मई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में किसानों को लुभाने में जुटी अखिलेश सरकार को एक और झटका लगा है। राज्य में किसानों को सहूलियत देने के लिए बड़े पैमाने पर ई-मंडियों की शुरुआत की गई, लेकिन ऑनलाइन नीलामी को तैयार इन मंडियों को खरीदार ही नहीं मिल रहे हैं। इसको लेकर किसानों में उत्साह भी नहीं देख रहा है।

लखनऊ, 15 मई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में किसानों को लुभाने में जुटी अखिलेश सरकार को एक और झटका लगा है। राज्य में किसानों को सहूलियत देने के लिए बड़े पैमाने पर ई-मंडियों की शुरुआत की गई, लेकिन ऑनलाइन नीलामी को तैयार इन मंडियों को खरीदार ही नहीं मिल रहे हैं। इसको लेकर किसानों में उत्साह भी नहीं देख रहा है।

मेरठ के एक किसान और मंडी कारोबारी हरपाल सिंह ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि ई-मंडियों के माध्यम से निलामी की व्यवस्था को मूर्त रूप देना उतना आसान नहीं है। उन्होंने बताया कि सुल्तानपुर में अपनी फसलों की ऑनलाइन बिक्री के लिए 40 लोगों ने पंजीकरण कराया, लेकिन अब तक एक भी किसान की फसल नहीं बिक पाई है।

सुल्तानपुर की तरह ही कई अन्य जिलों में भी यही हाल है। विभागीय सूत्रों की मानें तो उप्र में ई मंडियों की शुरुआत लखनऊ, बाराबंकी, मेरठ, एटा, ललितपुर, वाराणसी, बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, लखीमपुर, आगरा, इलाहाबाद, गोरखपुर, सीतापुर, मुजफ्फरनगर, हापुड़, बहराइच, मैनपुरी सहित लगभग दो दर्जन जिले शामिल हैं।

पुराने कारोबारियों की मानें तो उप्र में ई-मंडियों की व्यवस्था लागू करने में तकनीकी दिक्कतें हैं। यहां ज्यादातर छोटी जोत वाले किसान हैं और उनको इंटरनेट के माध्यम से फसल बेचने की तकनीक ही नहीं पता है। उनका शिक्षित न होना भी एक प्रमुख कारण है। यही स्थिति आढ़तियों की भी है।

कारोबरी हरपाल की मानें तो ई-मंडियों की सुविधा का लाभ ज्यादातर बड़ी जोत वाले किसानों को ही मिल रहा है। कानूनी पचड़े से बचने के लिये यूनीफाइड लाइसेंस लेने में छोटे किसान कतरा रहे हैं।

उप्र मंडी परिषद के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी आईएएनएस के साथ बातचीत के दौरान इन दावों की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि ई मंडियों के माध्यम से फसलों की बिक्री उतना आसान काम नहीं है। सबसे पहले इस तकनीक की जानकारी होनी बहुत आवश्यक है।

उन्होंने बताया, “किसान यदि अपनी उपज बेचने जाएगा तो उसकी जांच क्वालिटी टेस्टिंग लैब से की जाएगी। इसके बाद गुणवत्ता प्रमाणपत्र और अन्य ब्योरा निलामी के लिए सॉफ्टवेयर के माध्यम से वेबसाइट पर डाला जाएगा। यूनीफाइड लाइसेंसधारी ही उस फसल को ऑनलाइन खरीद पाएगा। सबसे अधिक बोली पर यदि किसान सहमत हो जाता है तो उसकी बोली को लॉक कर दिया जाता है।”

इस मामले में उद्योग व्यापार मंडल के महामंत्री गोपाल अग्रवाल के मुताबिक, यह प्रक्रिया मुश्किल होने के साथ ही अव्यावहारिक भी है। ऑनलाइन खरीदार के लिए उपज को वेबसाइट तक पहुंचाना इतना आसान नहीं है। ऐसे में केवल बहुराष्ट्रीय कंपनियों का ही भला होगा और जमाखोरी को प्रोत्साहन मिलेगा।

विभागीय सूत्रों की मानें तो उप्र की करीब 30 मंडियों को कम्प्यूटराइज्ड करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन अभी भी कई मंडियों में इस व्यवस्था का आभाव है।

इस बीच, मंडी परिषद के उपनिदेशक अमित यादव ने कहा कि अभी कुछ मंडियों में ही कम्प्यूटराइज्ड व्यवस्था हो पाई है। इसकी प्रक्रिया जारी है। जल्द ही इसका लाभ किसानों को मिलेगा।

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