उप्र : मॉब लिंचिंग आरोपियों को आजीवन कारावास चाहता है कानून आयोग

लखनऊ, 12 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश कानून आयोग ने मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या) के आरोपी को आजीवन कारावास की अनुशंसा कराने वाला मसौदा विधेयक दाखिल किया है।

आयोग के चेयरमैन (सेवानिवृत्त) ए.एन. मित्तल ने मॉब लिंचिंग की रिपोर्ट के साथ मसौदा विधेयक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी है।

आयोग द्वारा दाखिल की गई 128 पन्नों की रिपोर्ट में राज्य में लिंचिंग के विभिन्न मामलों का उल्लेख किया गया है और 2018 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर कानून को तत्काल लागू करने की अनुशंसा की गई है।

आयोग ने कहा कि मौजूदा कानून लिंचिंग से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं और जोर देकर कहा कि इन मामलों से निपटने के लिए एक अलग कानून होना चाहिए।

आयोग ने इस अपराध के लिए सात साल की जेल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का सुझाव दिया।

आयोग ने सुझाव दिया कि कानून को उत्तर प्रदेश मॉब लिंचिंग निरोध अधिनियम कहा जा सकता है और इसके तहत पुलिस अधिकारियों और जिला अधिकारियों और जिला अधिकारियों की जिम्मेदारियों का निर्धारण होने के साथ-साथ ड्यूटी करने में असमर्थ होने पर उन्हें दंड का प्रावधान भी दिया गया हो।

साल 2012 से 2019 से आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में मॉब लिंचिंग के 50 मामले हुए हैं। जिनमें 50 पीड़ितों में से 11 की मौत हो गई। इनमें से गोरक्षकों द्वारा हमले समेत 25 मामले गंभीर हमलों के थे।

कानून आयोग की सचिव सपना चौधरी ने कहा, “इस स्थिति की पृष्ठभूमि में आयोग ने अध्ययन किया और उसी अनुसार लिंचिंग से निपटने के लिए राज्य सरकार को जरूरी कानून की सिफारिश की।”

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