पांडवकालीन यह मंदिर सिद्ध पीठ के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर पर कभी नेपाल के राजा जल चढ़ाने आते थे। पूजा-अर्चना के बाद भगवा वस्त्रधारी मुख्यमंत्री स्थानीय श्रद्धालुओं से मिले और उन्हें आशीर्वाद दिया। इस दौरान कई लोगों ने अपने प्रार्थनापत्र भी उन्हें सौंपे।
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